हिमाचल: सीएम सुक्खू ने हाईकमान के समक्ष रखा शिक्षा रिपोर्ट कार्ड, बोले- स्कूल से विवि तक बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री ने सरकार के शिक्षा मॉडल की प्रमुख पहलें बताते हुए कहा कि अब फोकस केवल स्कूलों के विस्तार पर नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री बैठक में मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री के प्रस्तुतीकरण में सरकारी स्कूलों के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा की गुणवत्ता, मेरिट आधारित भर्ती, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटल शिक्षा और रोजगारपरक पाठ्यक्रम को शिक्षा सुधार के प्रमुख आधार के तौर पर रखा गया। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन में हिमाचल की स्थिति में सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की रैंकिंग 21वें स्थान से पांचवें स्थान तक पहुंची है। सरकार अब इसे आगे और बेहतर करने की रणनीति पर काम कर रही है। हिमाचल के पूर्ण साक्षर राज्य बनने के बाद सरकार का अगला लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता, सीखने के परिणाम और विद्यार्थियों की भविष्य की तैयारी को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में चयनित सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इसके साथ ही राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के साथ विकसित किया जा रहा है। सरकार की योजना विद्यार्थियों को एक ही परिसर में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, खेल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व को बताया कि सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देने के बजाय उन्हें प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार की बदलती जरूरतों के लिए तैयार करना है। शिक्षा सुधार के मॉडल में परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने को भी प्रस्तुतीकरण में प्रमुख स्थान दिया गया। मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी भी मौजूद रहे।
भर्ती में मेरिट और पारदर्शिता पर जोर
विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर भी सरकार अपने मॉडल में बदलाव कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में मेरिट और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है। हाल ही में विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को इसी दिशा में उठाए गए कदम के रूप में पेश किया गया। सरकार विश्वविद्यालयों में भर्तियां लोकसेवा आयोग के माध्यम से कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कुलपति की नियुक्ति को लेकर लोकभवन पर उठाए सवाल
बैठक के दौरान विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति से जुड़े विधेयक लोकभवन में लंबित रखे जा रहे हैं, जिससे सुधारों को लागू करने में अड़चन आ रही है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है।
शिक्षा के भगवाकरण के खिलाफ देशव्यापी अभियान की तैयारी
बैठक में शिक्षा व्यवस्था में एक विशेष विचारधारा के प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा और भर्तियों में विचारधारा विशेष को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है। इसके खिलाफ देशभर में अभियान चलाने का फैसला लिया गया।