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Chamba News: चौथी पीढ़ी के साथ रामलीला का मंचन कर कर रहे संगेड़ के रत्न
Thu, 10 Oct 2024 09:43 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 10 Oct 2024 09:43 PM IST
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रत्न चंद।संवादसंगेड की राम लीला वाली खबर के साथ
चंबा। रजेरा पंचायत में चौथी पीढ़ी के साथ संगेड़ निवासी रत्न चंद रामलीला का मंचन निभा रहे हैं। 1989 में उन्होंने संगेड़ गांव में रामलीला का मंचन शुरू किया था। तबसे लेकर आज तक वह स्वयं रामलीला मंचन का प्रबंधन कार्य संभाल रहे हैं।
नौ दिन तक वह रामलीला की स्टेज के पास ही जमीन पर सोते हैं। एक समय ही भोजन करते हैं। रामलीला के दौरान किस युवा को कौन सा किरदार देना है, इसको लेकर भी स्वयं निर्णय करते हैं। कोई भी उनके निर्णय के खिलाफ नहीं जाता। यही वजह है कि पिछले 34 साल से रामलीला का मंचन संगेड़ में उनकी देखरेख में हो रहा है। जब तक राम लीला चलती है, तब तक वह जूते भी नहीं पहनते। न आराम करने के लिए घर जाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक रामलीला मंचन की तैयारियों में लगे रहते हैं। शाम को रामलीला के किरदारों को सही से निभाने के लिए कलाकारों का मार्गदर्शन करते हैं। मंचन के बाद स्टेज में जमीन पर ही बिस्तर लगाकर सो जाते हैं। यह प्रक्रिया पिछले 34 सालों से चल रही है। उन्हें देखकर पंचायत के अन्य युवा प्रेरित होकर इस रामलीला क्लब के साथ जुड़ रहे हैं। संगेड़ गांव में होने वाली रामलीला को अन्य गांव के लोग भी देखने के लिए रात को पहुंचते हैं।
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नौ दिन तक वह रामलीला की स्टेज के पास ही जमीन पर सोते हैं। एक समय ही भोजन करते हैं। रामलीला के दौरान किस युवा को कौन सा किरदार देना है, इसको लेकर भी स्वयं निर्णय करते हैं। कोई भी उनके निर्णय के खिलाफ नहीं जाता। यही वजह है कि पिछले 34 साल से रामलीला का मंचन संगेड़ में उनकी देखरेख में हो रहा है। जब तक राम लीला चलती है, तब तक वह जूते भी नहीं पहनते। न आराम करने के लिए घर जाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक रामलीला मंचन की तैयारियों में लगे रहते हैं। शाम को रामलीला के किरदारों को सही से निभाने के लिए कलाकारों का मार्गदर्शन करते हैं। मंचन के बाद स्टेज में जमीन पर ही बिस्तर लगाकर सो जाते हैं। यह प्रक्रिया पिछले 34 सालों से चल रही है। उन्हें देखकर पंचायत के अन्य युवा प्रेरित होकर इस रामलीला क्लब के साथ जुड़ रहे हैं। संगेड़ गांव में होने वाली रामलीला को अन्य गांव के लोग भी देखने के लिए रात को पहुंचते हैं।
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