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Chamba News: मिंजर मेले में इस बार नहीं लग पाएंगे स्वयं सहायता समूहों के पारंपरिक स्वाद का स्टॉल
Fri, 24 Jul 2026 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 24 Jul 2026 11:02 PM IST
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पिछली बार सिड्डू, मोमोस, स्प्रिंग रोल और घर के बने व्यंजनों ने खींची थी भीड़
लाइव फूड की अनुमति न मिलने से मायूस, बोलीं- यही तो है हमारी पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। पिछले वर्ष अपने हाथों से तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाकर लोगों की सराहना हासिल करने वाली महिलाएं इस बार लाइव फूड स्टॉल नहीं लगा पाएंगी। इससे महिलाओं में मायूसी है। उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
पिछले वर्ष मिंजर मेले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सिड्डू, मोमोस, स्प्रिंग रोल, पेस्ट्री और चंबा के पारंपरिक खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉलों पर लोगों की खूब भीड़ उमड़ी थी। महिलाओं के हाथों से बने व्यंजनों ने न केवल मेले में अलग पहचान बनाई, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ मिला था।
स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुनीता मरोल, राजिंद्रा देवी और मनीषा देवी ने कहा कि वे लंबे समय से अपने हाथों से पारंपरिक खाद्य सामग्री तैयार कर रही हैं। सिड्डू, पेस्ट्री और अन्य व्यंजन बनाना उनके कौशल का हिस्सा है और इसी के माध्यम से वे अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके बनाए उत्पादों के स्टॉल ही नहीं लगेंगे तो वे अपनी मेहनत को लोगों तक कैसे पहुंचाएंगी। महिलाओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी उन्हें लाइव फूड और पारंपरिक खाद्य सामग्री के स्टॉल लगाने की अनुमति दी जाए।
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लाइव फूड की अनुमति न मिलने से मायूस, बोलीं- यही तो है हमारी पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। पिछले वर्ष अपने हाथों से तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाकर लोगों की सराहना हासिल करने वाली महिलाएं इस बार लाइव फूड स्टॉल नहीं लगा पाएंगी। इससे महिलाओं में मायूसी है। उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
पिछले वर्ष मिंजर मेले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सिड्डू, मोमोस, स्प्रिंग रोल, पेस्ट्री और चंबा के पारंपरिक खाद्य उत्पादों के स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉलों पर लोगों की खूब भीड़ उमड़ी थी। महिलाओं के हाथों से बने व्यंजनों ने न केवल मेले में अलग पहचान बनाई, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ मिला था।
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स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुनीता मरोल, राजिंद्रा देवी और मनीषा देवी ने कहा कि वे लंबे समय से अपने हाथों से पारंपरिक खाद्य सामग्री तैयार कर रही हैं। सिड्डू, पेस्ट्री और अन्य व्यंजन बनाना उनके कौशल का हिस्सा है और इसी के माध्यम से वे अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके बनाए उत्पादों के स्टॉल ही नहीं लगेंगे तो वे अपनी मेहनत को लोगों तक कैसे पहुंचाएंगी। महिलाओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी उन्हें लाइव फूड और पारंपरिक खाद्य सामग्री के स्टॉल लगाने की अनुमति दी जाए।
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