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हड़सर में शिव पुजारियों ने संचूई के शिव चेलों की आवाभगत
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भरमौर(चंबा)। मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद हड़सर गांव में शिव पुजारियों ने संचूई के शिव चेलों सहित भरमौर चौरासी की छड़ी का स्वागत किया।
यह परंपरा रही है कि मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद जब शिव चेले और चौरासी की छड़ी डलझील से लौटती है तो वापसी में हड़सर पर शिव पुजारी उनका स्वागत करते है। शिव पुजारी पंडित पुनू राम शर्मा ने बताया कि शिव चेलों के स्वागत की परंपरा सदियों चली आ रही है।
मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद हड़सर गांव में शिव चेले डेरा डालते हैं और पूरे गांव के शिव पुजारी चेलों का स्वागत करते हैैं। इसके बाद शिव चेलों और चौरासी की छड़ी ने भरमौर के लिए प्रस्थान किया।
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यह परंपरा रही है कि मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद जब शिव चेले और चौरासी की छड़ी डलझील से लौटती है तो वापसी में हड़सर पर शिव पुजारी उनका स्वागत करते है। शिव पुजारी पंडित पुनू राम शर्मा ने बताया कि शिव चेलों के स्वागत की परंपरा सदियों चली आ रही है।
मणिमहेश यात्रा के समापन के बाद हड़सर गांव में शिव चेले डेरा डालते हैं और पूरे गांव के शिव पुजारी चेलों का स्वागत करते हैैं। इसके बाद शिव चेलों और चौरासी की छड़ी ने भरमौर के लिए प्रस्थान किया।
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