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Chamba News: मेडिकल कॉलेज में सहायता केंद्र संचालित करना बना चुनौती
Sat, 02 Aug 2025 06:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 02 Aug 2025 06:56 AM IST
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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचार करवाने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को जरूरी परामर्श देने और उपचाराधीन मरीजों की सहूलियत के लिए व्हील चेयर, स्ट्रेचर लेने के लिए बनाया गया सहायता केंद्र संचालित करना प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है। आलम यह है कि सहायता कक्ष को चलाने के लिए निजी सुरक्षा प्रदाता कंपनी और मेडिकल कॉलेज में सफाई की व्यवस्था देख रही कंपनी एक-दूसरे पर जिम्मा डाल कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसे में लोगों की सहूलियत के लिए आरंभ किए गए सहायता कक्ष की सीट आखिरकार खाली ही नजर आ रही है। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन भी सहायता कक्ष के लिए स्वास्थ्य कर्मी तैनात करने से पीछे हटता नजर रहा है।
मेडिकल कॉलेज चंबा में विशेषज्ञों से उपचार के लिए रोजाना 1200-1400 तक की ओपीडी रहती है। इतना ही नहीं, वार्डों में 200 से अधिक मरीज विभिन्न बीमारियों के चलते उपचाराधीन हैं। कई ऑपरेशन करवाने वाले मरीज भी शामिल हैं। मरीजों, लोगों की सहूलियत के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से कुछ समय पूर्व सहायता कक्ष स्थापित करवाया गया। सूत्र खुलासा करते हैं कि प्रबंधन की ओर से सहायता कक्ष स्थापित करने के बाद इसे संचालित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती तक कुछ दिनों के लिए इसकी जिम्मेदारी सफाई का जिम्मा संभाल रहे कर्मचारियों को सौंपी। हैरत की बात यहां यह रही कि अमूमन कई माह बीतने के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती नहीं कर पाया है। कायदे से सहायता कक्ष के जरिये मरीजों के तीमारदारों को व्हील चेयर, स्ट्रेचर इत्यादि प्रदान करने, विभिन्न ओपीडी में मरीजों का मार्गदर्शन करने के लिए प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में निजी सुरक्षा प्रदाता कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अब निजी सुरक्षा प्रदाता कंपनी और मेडिकल कॉलेज में सफाई की व्यवस्था देख रही कंपनी एक-दूसरे पर ये जिम्मा डाल रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। जल्द ही समस्या का समाधान करवाने के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे।
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मेडिकल कॉलेज चंबा में विशेषज्ञों से उपचार के लिए रोजाना 1200-1400 तक की ओपीडी रहती है। इतना ही नहीं, वार्डों में 200 से अधिक मरीज विभिन्न बीमारियों के चलते उपचाराधीन हैं। कई ऑपरेशन करवाने वाले मरीज भी शामिल हैं। मरीजों, लोगों की सहूलियत के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से कुछ समय पूर्व सहायता कक्ष स्थापित करवाया गया। सूत्र खुलासा करते हैं कि प्रबंधन की ओर से सहायता कक्ष स्थापित करने के बाद इसे संचालित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती तक कुछ दिनों के लिए इसकी जिम्मेदारी सफाई का जिम्मा संभाल रहे कर्मचारियों को सौंपी। हैरत की बात यहां यह रही कि अमूमन कई माह बीतने के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती नहीं कर पाया है। कायदे से सहायता कक्ष के जरिये मरीजों के तीमारदारों को व्हील चेयर, स्ट्रेचर इत्यादि प्रदान करने, विभिन्न ओपीडी में मरीजों का मार्गदर्शन करने के लिए प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में निजी सुरक्षा प्रदाता कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में अब निजी सुरक्षा प्रदाता कंपनी और मेडिकल कॉलेज में सफाई की व्यवस्था देख रही कंपनी एक-दूसरे पर ये जिम्मा डाल रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। जल्द ही समस्या का समाधान करवाने के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे।
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