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दस रुपये के यूरिन टेस्ट के निजी लैब में वसूले रहे 500 रुपये
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निजी प्रयोगशाला में यूरिन टेस्ट के बदले में मरीज से काटी 500 रुपये की रसीद।
- फोटो : Chamba
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चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में यूरिन टेस्ट बंद होने का निजी लैब संचालक फायदा उठा रहे हैं। सरकारी प्रयोगशाला में दस रुपये में किए जाने वाले यूरिन टेस्ट का निजी प्रयोगशाला में 500 रुपये लिए जा रहे हैं।
मरीजों को मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर टेस्ट करवाना पड़ रहा है। इस कारण मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब में पहले यह टेस्ट किया जाता था। कुछ समय से वहां टेस्ट नहीं हो रहा है। इसके चलते मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना पड़ रहा है। यहां पर टेस्ट के शुल्क निर्धारित नहीं हैं। लैब संचालक मनमर्जी से पैसे वसूल रहे हैं। इसके ऊपर नियंत्रण करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। कई बार मरीज इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत भी कर चुके हैं। लेकिन आज दिन उन शिकायतों पर किसी भी अधिकारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। यही वजह है कि निजी प्रयोगशाला के मालिक मरीजों को लूट कर जेब भर रहे हैं।
किडनी, लीवर और मधुमेह की बीमारी होने पर डॉक्टर यूरिन टेस्ट की सलाह देते देते हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 40 से 50 मरीज इस टेस्ट को करवाते हैं। सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट बंद होने की वजह से ये मरीज निजी प्रयोगशाला में जा रहे हैं। जहां पर उनसे मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं। तीमारदारों में अशोक कुमार, जय सिंह, राकेश कुमार, हंसराज और मनीष सूद ने बताया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को निजी प्रयोगशालों में होने वाले टेस्ट के शुल्क निर्धारित करने चाहिए। ऐसा होने से मरीजों से होने वाली लूटपाट बंद हो सकती है।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। इस मामले में गंभीरता से जांच पड़ताल की जाएगी।
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मरीजों को मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर टेस्ट करवाना पड़ रहा है। इस कारण मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब में पहले यह टेस्ट किया जाता था। कुछ समय से वहां टेस्ट नहीं हो रहा है। इसके चलते मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में जाना पड़ रहा है। यहां पर टेस्ट के शुल्क निर्धारित नहीं हैं। लैब संचालक मनमर्जी से पैसे वसूल रहे हैं। इसके ऊपर नियंत्रण करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। कई बार मरीज इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत भी कर चुके हैं। लेकिन आज दिन उन शिकायतों पर किसी भी अधिकारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। यही वजह है कि निजी प्रयोगशाला के मालिक मरीजों को लूट कर जेब भर रहे हैं।
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किडनी, लीवर और मधुमेह की बीमारी होने पर डॉक्टर यूरिन टेस्ट की सलाह देते देते हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 40 से 50 मरीज इस टेस्ट को करवाते हैं। सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट बंद होने की वजह से ये मरीज निजी प्रयोगशाला में जा रहे हैं। जहां पर उनसे मनमाने दाम वसूल किए जा रहे हैं। तीमारदारों में अशोक कुमार, जय सिंह, राकेश कुमार, हंसराज और मनीष सूद ने बताया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को निजी प्रयोगशालों में होने वाले टेस्ट के शुल्क निर्धारित करने चाहिए। ऐसा होने से मरीजों से होने वाली लूटपाट बंद हो सकती है।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला अभी लाया गया है। इस मामले में गंभीरता से जांच पड़ताल की जाएगी।