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Chamba News: आकांक्षी जिला के सरकारी मेडिकल कॉलेज में नहीं हो रहे मरीजों के टेस्ट
Sun, 17 Sep 2023 10:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 17 Sep 2023 10:45 PM IST
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मेडिकल कॉलेज चंबा।
चंबा। आकांक्षी जिले के मरीजों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। आयुष्मान और हिमकेयर योजना में सरकार मुफ्त इलाज करवाने की बातें कर रही हैं, चंबा में इन योजनाओं के लाभार्थी मरीज निजी लैबों में पैसे देकर टेस्ट करवा रहे हैं।
इसके लिए शासन और प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं। तीन महीने से बंद पड़े टेस्ट सुचारू करवाने के लिए अभी तक शासन और प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को निजी लैबों में महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। आयुष्मान और हिमकेयर योजना का कार्ड लेकर मरीज अपना टेस्ट करवाने सरकारी लैब में जाते हैं तो वहां उन्हें सामान खत्म होने का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया जाता है।
मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला में तीन महीने से सीआरपी, थायराइड और यूरिन कल्चर के टेस्ट बंद हैं। मरीजों को निजी लैबों में जाकर महंगी फीस देकर ये टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज चंबा में रोजाना 500 से 700 की ओपीडी रहती है। ओपीडी में जाने वाले मरीजों को विशेषज्ञ सीआरपी का टेस्ट अवश्य लिखते हैं। ये टेस्ट सरकारी लैब में मुफ्त किया जाता है। लैब में मशीन खराब होने के कारण मरीजों का टेस्ट नहीं किया जा रहा है। इस कारण मरीजों को निजी लैब में जाकर 500 रुपये में यह टेस्ट करवाना पड़ रहा है। इसके अलावा 200 रुपये में होने वाले थायराइड टेस्ट के निजी लैबों में 500 से 700 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। इसी तरह कल्चर यूरिन टेस्ट भी नहीं हो रहा। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए सरकार ने क्रस्ना लैब भी शुरू की है। वहां पर भी ये टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। यदि टेस्ट कर भी दिए जाएं तो उनकी रिपोर्ट एक दिन में नहीं दी जाती।
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-- कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि टेस्ट शुरू करवाने के लिए सामान को लेकर ऑर्डर दिया जा चुका है। जल्द ही टेस्ट शुरू हो जाएंगे।
-- भाजपा पूर्व विधायक पवन नैयर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पटरी से उतरी है। इसके लिए कांग्रेस सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।
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सदर विधायक नीरज नैयर ने बताया कि कांग्रेस सरकार मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था को सुधार रही है। हाल ही में सरकार ने विशेषज्ञों की तैनाती है। बंद पड़े टेस्टों को भी शीघ्र शुरू करवाया जाएगा।
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इसके लिए शासन और प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं। तीन महीने से बंद पड़े टेस्ट सुचारू करवाने के लिए अभी तक शासन और प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को निजी लैबों में महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। आयुष्मान और हिमकेयर योजना का कार्ड लेकर मरीज अपना टेस्ट करवाने सरकारी लैब में जाते हैं तो वहां उन्हें सामान खत्म होने का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला में तीन महीने से सीआरपी, थायराइड और यूरिन कल्चर के टेस्ट बंद हैं। मरीजों को निजी लैबों में जाकर महंगी फीस देकर ये टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज चंबा में रोजाना 500 से 700 की ओपीडी रहती है। ओपीडी में जाने वाले मरीजों को विशेषज्ञ सीआरपी का टेस्ट अवश्य लिखते हैं। ये टेस्ट सरकारी लैब में मुफ्त किया जाता है। लैब में मशीन खराब होने के कारण मरीजों का टेस्ट नहीं किया जा रहा है। इस कारण मरीजों को निजी लैब में जाकर 500 रुपये में यह टेस्ट करवाना पड़ रहा है। इसके अलावा 200 रुपये में होने वाले थायराइड टेस्ट के निजी लैबों में 500 से 700 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। इसी तरह कल्चर यूरिन टेस्ट भी नहीं हो रहा। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए सरकार ने क्रस्ना लैब भी शुरू की है। वहां पर भी ये टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। यदि टेस्ट कर भी दिए जाएं तो उनकी रिपोर्ट एक दिन में नहीं दी जाती।
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सदर विधायक नीरज नैयर ने बताया कि कांग्रेस सरकार मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था को सुधार रही है। हाल ही में सरकार ने विशेषज्ञों की तैनाती है। बंद पड़े टेस्टों को भी शीघ्र शुरू करवाया जाएगा।