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पांच सालों के बाद परेल में रावी नदी पर बनेगा नया पुल
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परेल में रावी नदी पर बनाया जा रहा स्टील का नया पुल।
- फोटो : Chamba
चंबा। पांच साल के बाद अब 125 पंचायतों के लोगों को तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा। परेल के पास रावी नदी पर ढहे पुल के स्थान पर लोक निर्माण विभाग ने नया पुल तैयार कर दिया है।
पुल का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। अक्तूबर में पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु कर दिया जाएगा। पुल बनने से मेडिकल कॉलेज चंबा का नया भवन सीधे एनएच से जुड़ जाएगा। नए भवन से यदि किसी मरीज को टांडा रेफर किया जाता है तो उसे वाया बालू जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरोल से सीधे परेल होते हुए रोगी वाहन टांडा या पठानकोट की तरफ जा सकेंगे। इस स्टील पुल से तीन विधानसभा क्षेत्र चंबा, डलहौजी और चुराह की 125 पंचायतों के हजारों की आबादी को लाभ मिलेगा। साथ ही उनका सफर भी सुगम होगा।
वर्ष 2017 में जब परेल में बना पुल ढहा था तो इन तीन विधानसभा क्षेत्रों के लोग प्रभावित हुए थे। उन्हें जिला पठानकोट की तरफ आवाजाही करने के लिए तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा था। अब ये लोग भी सरोल से सीधे पठानकोट या अन्य जिलों की तरफ सफर कर पाएंगे। उन्हें तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा। सबसे ज्यादा फायदा ग्राम पंचायत सरोल, हरीपुर, उदयपुर, राजपुरा और साथ लगती अन्य पंचायतों को होगा। इन पंचायतों के लोगों को उदयपुर और सरोल आने-जाने के लिए वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। पुल बनने से इन पंचायतों की आपस में दूरी आधा किलोमीटर से भी कम रह जाएगी।
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95 मीटर लंबे पुल पर खर्च हो रहे दस करोड़
95 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर आठ से दस करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार को अक्तूबर में पुल तैयार करने के आदेश दिए हैं। पुल का 25 मीटर भाग आरसीसी और 70 मीटर भाग स्टील से बनाया गया है। पुल की मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। डलहौजी, भनौता, चनेड़, द्रड्डा, बाथरी, नैनीखड्ड, बनीखेत, गोली, परेल और दर्जनों पंचायतों के लोग इस पुल के जरिये चंद मिनटों में सरोल में बन रहे नए मेडिकल कॉलेज में पहुंच पाएंगे। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
मंडी तक आसानी से पहुंचेंगी नगदी फसलें
विधानसभा क्षेत्र चुराह और डलहौजी के सलूणी, किहार, मेड़ा, भांदल, सनूंह, संघणी, डियूर समेत सिढकुंड, हरीपुर, सरोल, माणी, मसरूंड, गैला, राजपुरा, कियाणी, राजनगर और अन्य पंचायतों के किसान-बागवान नगदी फसलों को बेचने के लिए पुल से पठानकोट की मंडी में आसानी से जा पाएंगे। पुल ध्वस्त होने के बाद किसानों को फसल पठानकोट की मंडी तक पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही थी। सरोल पहुंचने के बाद किसानों को पहले बालू जाना पड़ता था। उसके बाद परेल से होते हुए पठानकोट जाना पड़ता था। अब किसान सरोल से सीधे पुल के रास्ते पठानकोट को निकल पाएंगे।
दिहाड़ीदारों से लेकर कर्मचारियों को होगा फायदा
अशोक कुमार, शशि कुमार, रमेश चंद, किशोर, अमर चंद, टेक चंद, सुरेंद्र, भाग सिंह, योगराज और नरेंद्र ने बताया कि परेल में रावी नदी पर बना पुल 19 अक्तूबर 2017 को गिर गया था। पुल टूटने से लोग परेशान थे। इससे उनके कामकाज पर भी काफी असर पड़ा था। सिद्धपुरा के कई लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए परेल, उदयपुर, भनौता, चनेड़, सरू, कोहलड़ी, साच और सुल्तानपुर जाते हैं। उनको वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा था। ऐसे में नया पुल बनने से उन सभी लोगों को अपनी आजीविका कमाने में आसानी मिलेगी।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि परेल में स्टील ब्रिज का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चलाया गया है। अक्तूबर में पुल वाहनों की आवाजाही के लिए शुरू हो जाएगा। रावी नदी में जलस्तर बढ़ने की वजह से पुल का बचा हुआ कार्य करने में परेशानी हो रही है।
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पुल का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। अक्तूबर में पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु कर दिया जाएगा। पुल बनने से मेडिकल कॉलेज चंबा का नया भवन सीधे एनएच से जुड़ जाएगा। नए भवन से यदि किसी मरीज को टांडा रेफर किया जाता है तो उसे वाया बालू जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरोल से सीधे परेल होते हुए रोगी वाहन टांडा या पठानकोट की तरफ जा सकेंगे। इस स्टील पुल से तीन विधानसभा क्षेत्र चंबा, डलहौजी और चुराह की 125 पंचायतों के हजारों की आबादी को लाभ मिलेगा। साथ ही उनका सफर भी सुगम होगा।
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वर्ष 2017 में जब परेल में बना पुल ढहा था तो इन तीन विधानसभा क्षेत्रों के लोग प्रभावित हुए थे। उन्हें जिला पठानकोट की तरफ आवाजाही करने के लिए तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा था। अब ये लोग भी सरोल से सीधे पठानकोट या अन्य जिलों की तरफ सफर कर पाएंगे। उन्हें तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर नहीं करना पड़ेगा। सबसे ज्यादा फायदा ग्राम पंचायत सरोल, हरीपुर, उदयपुर, राजपुरा और साथ लगती अन्य पंचायतों को होगा। इन पंचायतों के लोगों को उदयपुर और सरोल आने-जाने के लिए वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। पुल बनने से इन पंचायतों की आपस में दूरी आधा किलोमीटर से भी कम रह जाएगी।
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95 मीटर लंबे पुल पर खर्च हो रहे दस करोड़
95 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण पर आठ से दस करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार को अक्तूबर में पुल तैयार करने के आदेश दिए हैं। पुल का 25 मीटर भाग आरसीसी और 70 मीटर भाग स्टील से बनाया गया है। पुल की मजबूती का विशेष ध्यान रखा गया है। डलहौजी, भनौता, चनेड़, द्रड्डा, बाथरी, नैनीखड्ड, बनीखेत, गोली, परेल और दर्जनों पंचायतों के लोग इस पुल के जरिये चंद मिनटों में सरोल में बन रहे नए मेडिकल कॉलेज में पहुंच पाएंगे। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
मंडी तक आसानी से पहुंचेंगी नगदी फसलें
विधानसभा क्षेत्र चुराह और डलहौजी के सलूणी, किहार, मेड़ा, भांदल, सनूंह, संघणी, डियूर समेत सिढकुंड, हरीपुर, सरोल, माणी, मसरूंड, गैला, राजपुरा, कियाणी, राजनगर और अन्य पंचायतों के किसान-बागवान नगदी फसलों को बेचने के लिए पुल से पठानकोट की मंडी में आसानी से जा पाएंगे। पुल ध्वस्त होने के बाद किसानों को फसल पठानकोट की मंडी तक पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही थी। सरोल पहुंचने के बाद किसानों को पहले बालू जाना पड़ता था। उसके बाद परेल से होते हुए पठानकोट जाना पड़ता था। अब किसान सरोल से सीधे पुल के रास्ते पठानकोट को निकल पाएंगे।
दिहाड़ीदारों से लेकर कर्मचारियों को होगा फायदा
अशोक कुमार, शशि कुमार, रमेश चंद, किशोर, अमर चंद, टेक चंद, सुरेंद्र, भाग सिंह, योगराज और नरेंद्र ने बताया कि परेल में रावी नदी पर बना पुल 19 अक्तूबर 2017 को गिर गया था। पुल टूटने से लोग परेशान थे। इससे उनके कामकाज पर भी काफी असर पड़ा था। सिद्धपुरा के कई लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए परेल, उदयपुर, भनौता, चनेड़, सरू, कोहलड़ी, साच और सुल्तानपुर जाते हैं। उनको वाया बालू होकर पांच किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा था। ऐसे में नया पुल बनने से उन सभी लोगों को अपनी आजीविका कमाने में आसानी मिलेगी।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर ने बताया कि परेल में स्टील ब्रिज का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चलाया गया है। अक्तूबर में पुल वाहनों की आवाजाही के लिए शुरू हो जाएगा। रावी नदी में जलस्तर बढ़ने की वजह से पुल का बचा हुआ कार्य करने में परेशानी हो रही है।