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Chamba News: न घर मिला न जमीन, किराये के कमरों में कट रही जिंदगी, कुछ प्रभावित बने शरणार्थी

Wed, 26 Jun 2024 10:58 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 26 Jun 2024 10:58 PM IST
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Neither house nor land was found, life was being spent in rented rooms, some affected became refugees.
चलादड गांव।संवाद
सिहुंता (चंबा)। दो साल पहले बरसात में बेघर हुए 27 परिवारों को अभी तक न आशियाना और न ही जमीन मिली है। कुछ परिवार अभी भी किराये के कमरों में रह रहे हैं, तो कुछ शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं।
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जिले के चलाडन गांव की सूरत नुकसान के बाद आज तक नहीं बदल पाई है। बरसात के मौसम में आई आपदा के दौरान सरकार और प्रशासन ने प्रभावितों को हरसंभव सहायता पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे तो किए थे, लेकिन इसके बाद इनके जख्मों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। अब फिर से बरसात आने वाली है।
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उपमंडल भटियात के तहत ग्राम पंचायत ककरोटी घट्टा के गांव चलाडन के आपदा प्रभावितों को राहत देने के लिए सरकार और प्रशासन ने तीन से चार परिवारों को एक-एक लाख रुपये दिए हैं। कई परिवार फौरी राहत तक ही सीमित रह पाए हैं। उस समय पांच से 15000 रुपये तक फौरी राहत दी गई थी। बड़े-बड़े दावों के बाद अपने घर खो चुके परिवारों के लिए दो साल बाद भी खुशी की खबर नहीं आई है। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री समेत नेता आपदा प्रभावितों का हाल-चाल जानने पहुंचे थे। सरकार राहत राशि जारी करने तक ही सीमित रह गई, जबकि विपक्ष के नेता भी ग्रामीणों को राहत नहीं दे पाए।
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मकान ढहे तो कही थी जमीन देने की भी बात
बरसात में अपने मकान खोने वाले बाबू राम, सरोती देवी, कैलाशो देवी, ओम प्रकाश, कृष्ण चंद, प्रीतम और पवन कुमार ने बताया कि बरसात में उनके मकान ढह गए थे। किराये के कमरों में रह रहे हैं। सरकार ने मकान का निर्माण करने के लिए जगह देने की बात कही थी, मगर अभी तक कुछ नहीं हो पाया है।
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अधिकतर परिवारों को मिली फौरी राहत
ग्राम पंचायत ककरोटी घट्टा के प्रधान देस राज ने बताया कि पिछली बरसात में गांव में काफी नुकसान हुआ था। कहा कि तीन से चार परिवारों को एक एक लाख रुपये मिले। अधिकतर परिवारों को सिर्फ फौरी ही राहत मिल पाई थी।

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एसडीएम पारस अग्रवाल ने कहा कि बरसात प्रभावितों के लिए प्रस्ताव बनाया गया था। इसके लिए भटियात में प्रभावितों को मकान निर्माण के लिए जमीन दी जानी थी, मगर भटियात में जगह नहीं मिल पाई। अब कांगड़ा प्रशासन को इस बारे में लिखा गया है, जिससे वहां खाली जमीन मिल सके। --
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