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Chamba News: भलेई कॉलेज बंद करने के फैसले पर बिफरे विधायक
Sun, 07 Jun 2026 10:29 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 07 Jun 2026 10:29 PM IST
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बोले- सरकार को संस्थान को मजबूत बनाने के लिए उठाने चाहिए थे कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
तेलका (चंबा)। कम छात्र संख्या वाले महाविद्यालयों के विलय और बंद करने के सरकार के फैसले पर विधायक डीएस ठाकुर ने नाराजगी जताई है।
उन्होंने भलेई कॉलेज को बंद करने के निर्णय को गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय करार दिया। विधायक ने कहा कि भलेई जैसे दुर्गम क्षेत्र में यह कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों और विशेष रूप से छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। संस्थान को बंद करने के बजाय सरकार को इसे मजबूत बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए थे।
आरोप लगाया कि कॉलेज में छात्र संख्या घटने के लिए सरकार और शिक्षा मंत्री के साथ साथ विभाग की नीतियां जिम्मेदार हैं। वर्षों तक न तो पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की गई और न ही स्थायी भवन निर्माण की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए। पूर्व जयराम सरकार के दौरान भवन निर्माण के लिए 5 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई थी। बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों का रुझान धीरे-धीरे कम होता गया। कॉलेज की स्थापना के शुरुआती वर्षों में यहां करीब 350 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं ने इसी संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की। विधायक ने चिंता जताई कि भलेई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कई छात्राएं आर्थिक एवं सामाजिक कारणों से दूरदराज के शहरों में पढ़ाई के लिए नहीं जा सकतीं। ऐसे में कॉलेज का बंद होना उनके लिए बड़ी बाधा साबित होगा। कहा कि यह मुद्दा वह पहले भी विधानसभा में उठा चुके हैं। अगले सत्र में भी मजबूती से सरकार के सामने रखेंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
तेलका (चंबा)। कम छात्र संख्या वाले महाविद्यालयों के विलय और बंद करने के सरकार के फैसले पर विधायक डीएस ठाकुर ने नाराजगी जताई है।
उन्होंने भलेई कॉलेज को बंद करने के निर्णय को गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय करार दिया। विधायक ने कहा कि भलेई जैसे दुर्गम क्षेत्र में यह कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों और विशेष रूप से छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। संस्थान को बंद करने के बजाय सरकार को इसे मजबूत बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए थे।
आरोप लगाया कि कॉलेज में छात्र संख्या घटने के लिए सरकार और शिक्षा मंत्री के साथ साथ विभाग की नीतियां जिम्मेदार हैं। वर्षों तक न तो पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की गई और न ही स्थायी भवन निर्माण की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए। पूर्व जयराम सरकार के दौरान भवन निर्माण के लिए 5 करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई थी। बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों का रुझान धीरे-धीरे कम होता गया। कॉलेज की स्थापना के शुरुआती वर्षों में यहां करीब 350 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं ने इसी संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की। विधायक ने चिंता जताई कि भलेई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कई छात्राएं आर्थिक एवं सामाजिक कारणों से दूरदराज के शहरों में पढ़ाई के लिए नहीं जा सकतीं। ऐसे में कॉलेज का बंद होना उनके लिए बड़ी बाधा साबित होगा। कहा कि यह मुद्दा वह पहले भी विधानसभा में उठा चुके हैं। अगले सत्र में भी मजबूती से सरकार के सामने रखेंगे।
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