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Chamba News: पुरुषों ने डाली चुराही नाटी, महिलाओं ने किया घुरेई नृत्य
Wed, 27 Sep 2023 10:18 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 27 Sep 2023 10:18 PM IST
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चंबा में चुराह के तीसा में जातर मेले के दौरान प्रस्तुति देते स्थानिय कलाकार।स्त्रोत:संवाद
तीसा (चंबा)। चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत तीसा प्रथम के तहत देहरा नामक स्थान पर स्थित चामुंडा और शीतला माता मंदिर में आयोजित जातर मेले का बुधवार को समापन हो गया।
जातर मेले में पुरुषों ने चोला और डोरा पहनकर पारंपरिक लोक नृत्य चुराही नाटी डाली। महिलाओं ने लोक गीत घुरेई गाकर नृत्य किया। मान्यता है कि मंदिर के समीप खेतों में हल चलाते समय एक मूर्ति प्रकट हुई थी, जिसे स्थापित करने के लिए मंदिर का निर्माण करवाया गया। देहरा के समीप स्थित गांव शेरूआ नामक गांव की एक बालिका की ओर से समाधि लेने के बाद ही चामुंडा देवी माता मंदिर की स्थापना हुई है। दिन भर निर्माण कार्य होने के बाद अगले दिन निर्माण कार्य धराशायी हो जाता था। यह क्रम कई दिन तक बदस्तूर जारी रहा। तब शेरूआ गांव में एक देवी स्वरूप एक बालिका ने स्वयं कहा कि मुझे जिंदा समाधि दी जाए। उसके बाद ही मंदिर निर्माण होना संभव होगा। आखिरकार परिजन और ग्रामीण बाजे-गाजे के साथ मंदिर स्थल पर बालिका को लाए और उसकी समाधि के बाद ही मंदिर निर्माण हो सका। चामुंडा माता मंदिर कमेटी अध्यक्ष भीष्मदत्त ठाकुर, सचिव रविंद्र ठाकुर और पवन ठाकुर ने बताया कि लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक जातर मेला कई सालों से पीढ़ी दर पीढ़ी आयोजित होता रहा है।
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जातर मेले में पुरुषों ने चोला और डोरा पहनकर पारंपरिक लोक नृत्य चुराही नाटी डाली। महिलाओं ने लोक गीत घुरेई गाकर नृत्य किया। मान्यता है कि मंदिर के समीप खेतों में हल चलाते समय एक मूर्ति प्रकट हुई थी, जिसे स्थापित करने के लिए मंदिर का निर्माण करवाया गया। देहरा के समीप स्थित गांव शेरूआ नामक गांव की एक बालिका की ओर से समाधि लेने के बाद ही चामुंडा देवी माता मंदिर की स्थापना हुई है। दिन भर निर्माण कार्य होने के बाद अगले दिन निर्माण कार्य धराशायी हो जाता था। यह क्रम कई दिन तक बदस्तूर जारी रहा। तब शेरूआ गांव में एक देवी स्वरूप एक बालिका ने स्वयं कहा कि मुझे जिंदा समाधि दी जाए। उसके बाद ही मंदिर निर्माण होना संभव होगा। आखिरकार परिजन और ग्रामीण बाजे-गाजे के साथ मंदिर स्थल पर बालिका को लाए और उसकी समाधि के बाद ही मंदिर निर्माण हो सका। चामुंडा माता मंदिर कमेटी अध्यक्ष भीष्मदत्त ठाकुर, सचिव रविंद्र ठाकुर और पवन ठाकुर ने बताया कि लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक जातर मेला कई सालों से पीढ़ी दर पीढ़ी आयोजित होता रहा है।
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