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Chamba News: मुफ्त में मिलने वाली वर्दी के देने पड़ रहे 1400 रुपये
Mon, 22 Apr 2024 10:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 22 Apr 2024 10:32 PM IST
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चंबा। निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए वर्दी का रंग बदलने की व्यवस्था अब अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ने लगा है।
एक विद्यार्थी के लिए वर्दी की खरीद पर उन्हें 1200 से लेकर 1400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से महज छह सौ रुपये की राशि दी जा रही है। सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी छह सौ रुपये की राशि से भी वंचित हैं। अन्य श्रेणियों के विद्यार्थियों को यह राशि आगामी समय में प्रदेश सरकार देगी। वर्दी की खरीद अभिभावकों की जेबों पर डाका डालने के समान हो गई। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने अलग-अलग रंग सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए दिए हैं। अगर सरकार ही वर्दी उपलब्ध करवाती तो उन्हें काफी राहत मिलनी थी। अब मात्र छह सौ रुपये की राशि देकर सरकार ने उन पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि एक पेंट ही चार सौ से सात सौ रुपये के बीच मिल रही है। अन्य सामान डालकर उन्हें हजारों की राशि खर्चनी पड़ रही है।
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सरकार ने जो यह फैसला लिया है, वह सही नहीं है। आज के समय में छह सौ रुपये में पूरी वर्दी बाजार में मिलना असंभव है। सरकार को ही पहले की तरह वर्दी उपलब्ध करवानी चाहिए।
- अरशद खान
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सरकार ने निजी की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में अलग-अलग रंग की वर्दी शुरू करने के प्रयास तो किए हैं, मगर एक तरफ से अभिभावकों की जेबों पर यह डाका है। अतिरिक्त राशि खर्चनी पड़ रही है।
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- अंकू कुमार
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पहले सरकार की तरफ से वर्दी दी जाती थी। साथ ही सिलाई के लिए राशि का भी अलग प्रावधान रहता है। ऐसे में उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होती थी। इस वर्दी ने उनका बजट डगमगा दिया है।
- अजय कुमार
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जो अभिभावक सुविधा संपन्न हैं, उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं है। सरकारी स्कूलों में मजदूरी करने वाले अभिभावकों के बच्चे भी पढ़ रहे हैं। ऐसे में महंगी वर्दी खरीदना उनकी पहुंच से बाहर है।
- बंटू कुमार
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उच्च शिक्षा उपनिदेशक चंबा प्यार सिंह चाढ़क ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार यह व्यवस्था हुई है। कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति चाहे तो पुरानी वर्दी रख सकती है। यह फैसला स्कूल प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों पर निर्भर है।
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एक विद्यार्थी के लिए वर्दी की खरीद पर उन्हें 1200 से लेकर 1400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से महज छह सौ रुपये की राशि दी जा रही है। सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी छह सौ रुपये की राशि से भी वंचित हैं। अन्य श्रेणियों के विद्यार्थियों को यह राशि आगामी समय में प्रदेश सरकार देगी। वर्दी की खरीद अभिभावकों की जेबों पर डाका डालने के समान हो गई। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने अलग-अलग रंग सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए दिए हैं। अगर सरकार ही वर्दी उपलब्ध करवाती तो उन्हें काफी राहत मिलनी थी। अब मात्र छह सौ रुपये की राशि देकर सरकार ने उन पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि एक पेंट ही चार सौ से सात सौ रुपये के बीच मिल रही है। अन्य सामान डालकर उन्हें हजारों की राशि खर्चनी पड़ रही है।
सरकार ने जो यह फैसला लिया है, वह सही नहीं है। आज के समय में छह सौ रुपये में पूरी वर्दी बाजार में मिलना असंभव है। सरकार को ही पहले की तरह वर्दी उपलब्ध करवानी चाहिए।
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- अरशद खान
सरकार ने निजी की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में अलग-अलग रंग की वर्दी शुरू करने के प्रयास तो किए हैं, मगर एक तरफ से अभिभावकों की जेबों पर यह डाका है। अतिरिक्त राशि खर्चनी पड़ रही है।
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- अंकू कुमार
पहले सरकार की तरफ से वर्दी दी जाती थी। साथ ही सिलाई के लिए राशि का भी अलग प्रावधान रहता है। ऐसे में उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होती थी। इस वर्दी ने उनका बजट डगमगा दिया है।
- अजय कुमार
जो अभिभावक सुविधा संपन्न हैं, उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं है। सरकारी स्कूलों में मजदूरी करने वाले अभिभावकों के बच्चे भी पढ़ रहे हैं। ऐसे में महंगी वर्दी खरीदना उनकी पहुंच से बाहर है।
- बंटू कुमार
उच्च शिक्षा उपनिदेशक चंबा प्यार सिंह चाढ़क ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार यह व्यवस्था हुई है। कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति चाहे तो पुरानी वर्दी रख सकती है। यह फैसला स्कूल प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों पर निर्भर है।