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हर्ष महाजन ने आठ साल बाद भी नहीं खोले सियासी पत्ते
ब्यूरो, अमर उजाला/ (चंबा)।
Updated Wed, 17 Feb 2016 11:18 PM IST
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करीब आठ सालों बाद चंबा लौटे हर्ष महाजन को यहीं से चुनाव लड़ाने की पैरवी करने वाले सैकड़ों थे। भीड़ में मौजूद हर कोई उनके मुंह से यही सुनना चाहता था कि वे आगामी विधानसभा चुनाव पर क्या बोलेंगे।
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जब सवाल हुआ तो राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हर्ष महाजन बेहद आसानी से बात को टाल गए। न उन्होंने कार्यकर्ताओं की हां में हां मिलाई और न ही उन्हें इंकार कर नाराज किया। लेकिन चंबा में बुधवार को जो कुछ भी हो रहा था उसके बाद हर्ष महाजन को लेकर सियासत गर्मा गई है। वर्ष 2017 में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं और प्रदेश में सत्ता परिर्वतन का इतिहास देखते हुए उस समय कांग्रेस के लिए एक-एक सीट बटोरना जरूरी होगा। ऐसे में हर्ष महाजन की पुश्तैनी चंबा सदर सीट कांग्रेस के लिए आसान विकल्प हो सकता है।
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हर्ष महाजन वीरभद्र सिंह गुट से हैं और उनके काफी नजदीक हैं। लेकिन हर्ष महाजन के लिए प्रदेश के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में कोई भी कांग्रेसी विधायक या पूर्व विधायक अपनी सीट खाली नहीं करेगा। जबकि चंबा में हर्ष महाजन के पलायन के बाद कांग्रेस ने दो बार पवन नैय्यर को उम्मीदवार बनाया था और बुधवार को भरी सभा में पवन नैय्यर ने ही हर्ष महाजन के लिए सीट छोड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने खुद हर्ष महाजन से चंबा से चुनाव लड़ने की बात कही। जाहिर है हर्ष महाजन के लिए वर्ष 2017 तक सभी परिस्थितियां चुनाव लड़ने के अनुकूल तैयार की जा रही हैं।
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हर्ष महाजन के संबोधन में निकली दो बातों पर भी चंबा में दिन भर चर्चा होती रही है। जिसमें उन्होंने सदर से भाजपा विधायक पर तीखी टिप्पणी की है और 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की बात कही है। चंबा में उनके चाहने वाले इन दोनों बातों को उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं के रूप में देख रहे हैं। बहरहाल, हर्ष महाजन चंबा में सुलगती चिंगारी छोड़ गए हैं। उनकी वापसी के नाम पर कांग्रेस में उनके विरोधियों ने हथियार डाल दिए हैं और भाजपा के लिए भी यह शून्य पर आने जैसे हालात हैं। अब देखना यह है कि हर्ष महाजन का आगामी चंबा दौरा किस बहाने होता है।