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Chamba News: जीआई टैग से चमकी सफेद मक्का की किस्मत, पैदावार बढ़ी तो लौटी नई उम्मीद

Thu, 02 Jul 2026 10:21 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Thu, 02 Jul 2026 10:21 PM IST
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GI tag boosts fortunes of white maize; increased yield brings renewed hope.
सलूणी में 150 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हो रही खेती, पठानकोट-डमटाल तक पहुंचेगी पहचान
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देसी बीजों के संरक्षण पर भी बढ़ा जोर, रकबा और पैदावार दोनों में हुई है बढ़ोतरी


संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी (चंबा)। विकास खंड सलूणी की पारंपरिक सफेद मक्का को जीआई टैग मिलने के बाद किसानों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार करीब 150 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती हुई है जिससे पैदावार और बाजार दोनों को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। पहले की अपेक्षा इस बार सफेद मक्का का रकबा और पैदावार दोनों बढ़े हैं। क्षेत्र के भांदल, संघणी और लंगेरा सहित आसपास के इलाकों में करीब 150 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सफेद मक्का की बिजाई की गई है। किसानों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से अब सलूणी की सफेद मक्का को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे। सलूणी क्षेत्र में तैयार होने वाले मक्का की चंबा के साथ प्रदेश के अन्य जिलों और डमटाल व पठानकोट में रहती है।
सलूणी की सफेद मक्का अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण वर्षों से क्षेत्र की पहचान रही है। इसकी खेती आज भी पूरी तरह देसी बीजों से की जाती है। खास बात यह है कि किसान परंपरागत तरीके से इन बीजों को मिट्टी के बर्तनों में सुरक्षित रखते हैं, ताकि उनकी गुणवत्ता और शुद्धता बनी रहे। यही वजह है कि इस मक्का का स्वाद और पोषण अन्य किस्मों से अलग माना जाता है।
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परिचर्चा
- हम कई पीढ़ियों से सफेद मक्का की खेती कर रहे हैं। इसके बीज आज भी मिट्टी के बर्तनों में सुरक्षित रखते हैं ताकि इसकी शुद्धता बनी रहे। जीआई टैग मिलने से अब उम्मीद है कि हमारी फसल को बेहतर दाम मिलेंगे और सलूणी की पहचान पूरे देश में बनेगी। मोहम्मद यादीन
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- सफेद मक्का सामान्य मक्का से अलग और अधिक पौष्टिक होती है। पहले इसकी बिक्री केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रहती थी, लेकिन अब बाहरी जिलों से भी मांग बढ़ने की उम्मीद है। इससे किसानों का इस फसल की ओर रुझान और बढ़ेगा। आशया प्रवीण
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- इस बार हमने पहले से अधिक क्षेत्र में सफेद मक्का की बिजाई की है। यदि सरकार विपणन और उचित मूल्य की व्यवस्था करे तो आने वाले वर्षों में इसकी खेती कई गुना बढ़ सकती है। जीआई टैग किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि है। खातुन बेगम
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- सफेद मक्का हमारे परिवार की पारंपरिक फसल है। हम इसे केवल खेती नहीं, बल्कि अपनी विरासत मानते हैं। जीआई टैग मिलने से अब इस देसी किस्म को बचाने और अधिक किसानों तक पहुंचाने का उत्साह बढ़ा है। हमें भरोसा है कि इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी। - मोहम्मद सलीम


--कृषि उपकेंद्र सलूणी के एसएमएस विकास कपूर ने बताया कि भांदल, संघणी और लंगेरा जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से किसान सफेद मक्का की खेती कर रहे हैं। इस पारंपरिक फसल को जीआई टैग मिलने के बाद किसानों को इसे अधिक से अधिक अपनाने और संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह फसल सलूणी की नई पहचान बनेगी।
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