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Chamba News: भद्रवाह से पहुंचा पहला जत्था, चौगान में डेरा लगाने के बाद मणिमहेश रवाना
Thu, 27 Aug 2026 10:49 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 27 Aug 2026 10:49 PM IST
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मणिमहेश के लिए जाते जेएंडके का जत्था में श्रद्धालु। संवाद
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भरमौर में सबसे पहले भरमाणी माता के करेंगे दर्शन, फिर डलझील में लगाएंगे डुबकी
चौगान में डेरा लगाने की अपनी पुरानी परंपरा का यह शिव भक्त आज भी कर रहे निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। भद्रवाह से चंबा पहुंचा जत्था चौगान में पड़ाव डालने के बाद मणिमहेश के लिए रवाना हुआ। पुरानी परंपरा के अनुसार भद्रवाह और डोडा से मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालु चंबा पहुंचने पर चौगान में डेरा अवश्य लगाते हैं।
इस परंपरा का निर्वहन ये श्रद्धालु आज भी कर रहे हैं। वीरवार को सुबह वाहनों के जरिये 100 लोगों का जत्था भद्रवाह से चंबा पहुंचा। शिव चिह्नों को उन्होंने चौगान में स्थापित किया। इसके बाद लक्ष्मीनारायण मंदिर जाकर दर्शन किए। शाम को शिव चिन्हों को उठाकर जत्था चौगान से पैदल भरमौर चौक पहुंचा। वहां से अपने वाहनों में सवार होकर भरमौर के लिए प्रस्थान किया।
यह जत्था रक्षाबंधन पर्व पर डलझील में डुबकी लगाएगा। जत्थे में शामिल राजिंद्र सिंह, भगवान दास, शेखर, अर्जुन और सूरज ने बताया कि डलझील रवाना होने से पहले उनका जत्था भरमाणी माता के दर्शन करेगा। वहां से धन्छौ होते हुए डलझील जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले साल आपदा के कारण हजारों शिव भक्त मणिमहेश यात्रा नहीं कर पाए थे। भद्रवाह और डोडा से आए जत्थों को भी चंबा से वापिस लौटना पड़ा था लेकिन इस बार श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। भगवान शंकर के पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन करने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिए श्रद्धालु पिछले साल की तुलना में अधिक संख्या में यात्रा पर जाएंगे।
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चौगान में डेरा लगाने की अपनी पुरानी परंपरा का यह शिव भक्त आज भी कर रहे निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। भद्रवाह से चंबा पहुंचा जत्था चौगान में पड़ाव डालने के बाद मणिमहेश के लिए रवाना हुआ। पुरानी परंपरा के अनुसार भद्रवाह और डोडा से मणिमहेश जाने वाले श्रद्धालु चंबा पहुंचने पर चौगान में डेरा अवश्य लगाते हैं।
इस परंपरा का निर्वहन ये श्रद्धालु आज भी कर रहे हैं। वीरवार को सुबह वाहनों के जरिये 100 लोगों का जत्था भद्रवाह से चंबा पहुंचा। शिव चिह्नों को उन्होंने चौगान में स्थापित किया। इसके बाद लक्ष्मीनारायण मंदिर जाकर दर्शन किए। शाम को शिव चिन्हों को उठाकर जत्था चौगान से पैदल भरमौर चौक पहुंचा। वहां से अपने वाहनों में सवार होकर भरमौर के लिए प्रस्थान किया।
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यह जत्था रक्षाबंधन पर्व पर डलझील में डुबकी लगाएगा। जत्थे में शामिल राजिंद्र सिंह, भगवान दास, शेखर, अर्जुन और सूरज ने बताया कि डलझील रवाना होने से पहले उनका जत्था भरमाणी माता के दर्शन करेगा। वहां से धन्छौ होते हुए डलझील जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले साल आपदा के कारण हजारों शिव भक्त मणिमहेश यात्रा नहीं कर पाए थे। भद्रवाह और डोडा से आए जत्थों को भी चंबा से वापिस लौटना पड़ा था लेकिन इस बार श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। भगवान शंकर के पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन करने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिए श्रद्धालु पिछले साल की तुलना में अधिक संख्या में यात्रा पर जाएंगे।
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