{"_id":"69e1176f03ef7a91ff04f498","slug":"deliberations-on-the-revival-of-the-takri-script-at-salooni-college-chamba-news-c-88-1-cmb1002-180595-2026-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: सलूणी कॉलेज में टांकरी लिपि के पुनर्जीवन विषय पर मंथन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: सलूणी कॉलेज में टांकरी लिपि के पुनर्जीवन विषय पर मंथन
Thu, 16 Apr 2026 10:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 16 Apr 2026 10:37 PM IST
विज्ञापन
वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला शुरू, 21 अप्रैल तक रोजाना होगा चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी (चंबा)। राजकीय महाविद्यालय सलूणी में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों एवं सांस्कृतिक संरक्षण में क्षमता निर्माण की पहल पर टांकरी लिपि का पुनर्जीवन विषय पर सात दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला शुरू हुई।
कार्यशाला 15 से 21 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से 8:30 बजे तक ऑनलाइन होगी। कार्यशाला कॉलेज का शोध, नवाचार एवं संरक्षण प्रकोष्ठ हिम संस्कृति शोध संस्थान आनी के साथ शैक्षणिक समझौता ज्ञापन के अंतर्गत करवा रहा है। विशेष रूप से यह कार्यक्रम कॉलेज की स्थापना के दो दशक पूरा होने के उपलक्ष्य में करवाया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला के टैगोर फेलो डॉ. ओम प्रकाश शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह लिपि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध भाषाई एवं साहित्यिक विरासत की धरोहर है। प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने कहा कि संस्थान शोध-आधारित शिक्षा और क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति सतत प्रतिबद्ध है। हिम संस्कृति शोध संस्थान के निदेशक डॉ. यज्ञ दत्त शर्मा ने कहा कि यह पहल स्वदेशी लिपियों में रुचि रखने वाले शिक्षार्थियों और शोधकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करेगी। कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को गूगल मीट के माध्यम से लाइव सत्रों में जोड़ा जा रहा है जबकि अध्ययन सामग्री व्हाट्सएप समूह के जरिये साझा की जा रही है। असाइनमेंट और फीडबैक की भी सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है।
--
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी (चंबा)। राजकीय महाविद्यालय सलूणी में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों एवं सांस्कृतिक संरक्षण में क्षमता निर्माण की पहल पर टांकरी लिपि का पुनर्जीवन विषय पर सात दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला शुरू हुई।
कार्यशाला 15 से 21 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से 8:30 बजे तक ऑनलाइन होगी। कार्यशाला कॉलेज का शोध, नवाचार एवं संरक्षण प्रकोष्ठ हिम संस्कृति शोध संस्थान आनी के साथ शैक्षणिक समझौता ज्ञापन के अंतर्गत करवा रहा है। विशेष रूप से यह कार्यक्रम कॉलेज की स्थापना के दो दशक पूरा होने के उपलक्ष्य में करवाया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला के टैगोर फेलो डॉ. ओम प्रकाश शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह लिपि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध भाषाई एवं साहित्यिक विरासत की धरोहर है। प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने कहा कि संस्थान शोध-आधारित शिक्षा और क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति सतत प्रतिबद्ध है। हिम संस्कृति शोध संस्थान के निदेशक डॉ. यज्ञ दत्त शर्मा ने कहा कि यह पहल स्वदेशी लिपियों में रुचि रखने वाले शिक्षार्थियों और शोधकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करेगी। कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को गूगल मीट के माध्यम से लाइव सत्रों में जोड़ा जा रहा है जबकि अध्ययन सामग्री व्हाट्सएप समूह के जरिये साझा की जा रही है। असाइनमेंट और फीडबैक की भी सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है।
विज्ञापन