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12 सालों में दम तोड़ गया रावी नदी पर बना परेल पुल
Updated Sat, 21 Oct 2017 12:22 AM IST
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चंबा। रावी नदी पर बना परेल पुल ध्वस्त होने के बाद पुल का निर्माण करवाने वाले ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठना शुरू हो गए हैं। महज 12 साल की अवधि में ही पुल के गिरने से लोग काफी हैरान हैं।
लोगों को यही सवाल सामने आ रहा है कि आखिरकार 12 सालों में ही पुल दम कैसे तोड़ गया। कुल मिलाकर लोगों को यह सवाल पुल निर्माण की अनियमितताओं को उजागर करने में काफी है। हालांकि प्रशासन व लोक निर्माण विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की बात कर रहा है। पुल गिरने का मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया है। लोग साफ कह रहे हैं कि इस पुल के निर्माण कार्य में कहीं न कहीं अनियमितताएं बरती गई हैं। इसी वजह से यह पुल गिरा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पुल का निर्माण कार्य पंचकूला के एक सरकारी ठेकेदार ने करवाया था। पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुआ था और 2005 में इस पुल का लोकार्पण कर दिया गया था। 1.09 करोड़ की लागत से यह पुल बनकर तैयार हुआ था। लेकिन वीरवार को दिवाली की सुबह यह पुल गिर गया। इसके चलते छह लोग घायल हो गए।
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वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल द्वारा रावी नदी पर बनने वाले परेल-सरोल का शिलान्यास किया गया था। 31 मई वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा इस पुल का लोकार्पण किया गया था। कुल मिलाकर यह पुल 12 वर्षों में ही क्षतिग्रस्त हो गया है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता जेएस ठाकुर ने बताया कि इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुुआ था। जबकि पुल का लोकार्पण वर्ष 2005 में किया गया था। कहा कि पुल के गिरने की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही पुल के गिरने का खुलासा हो सकता है। पुल का निर्माण कार्य पंचकूला के रहने वाले ठेकेदार ने करवाया था।
लंबे रूट पर दौड़ने वाली एचआरटीसी की बसें चंबा-शिमला, चंबा-चामुंडा व चंबा मंडी अब सीधे रूट पर जाएंगी। पहले यह बसें वाया घोल्टी, सरोल भद्रम होकर परेल पुल से गुजरती थीं। लेकिन, अब पुल गिर जाने के चलते इस रूट पर गाड़ियां नहीं जाएंगी। आरएम चंबा वीके शर्मा ने बताया कि परेल पुल गिरने की वजह से वाया सरोल होने के बजाय बसें सीधे रूट पर जा रही हैं।
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लोगों को यही सवाल सामने आ रहा है कि आखिरकार 12 सालों में ही पुल दम कैसे तोड़ गया। कुल मिलाकर लोगों को यह सवाल पुल निर्माण की अनियमितताओं को उजागर करने में काफी है। हालांकि प्रशासन व लोक निर्माण विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करने की बात कर रहा है। पुल गिरने का मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया है। लोग साफ कह रहे हैं कि इस पुल के निर्माण कार्य में कहीं न कहीं अनियमितताएं बरती गई हैं। इसी वजह से यह पुल गिरा है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पुल का निर्माण कार्य पंचकूला के एक सरकारी ठेकेदार ने करवाया था। पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुआ था और 2005 में इस पुल का लोकार्पण कर दिया गया था। 1.09 करोड़ की लागत से यह पुल बनकर तैयार हुआ था। लेकिन वीरवार को दिवाली की सुबह यह पुल गिर गया। इसके चलते छह लोग घायल हो गए।
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वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल द्वारा रावी नदी पर बनने वाले परेल-सरोल का शिलान्यास किया गया था। 31 मई वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा इस पुल का लोकार्पण किया गया था। कुल मिलाकर यह पुल 12 वर्षों में ही क्षतिग्रस्त हो गया है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता जेएस ठाकुर ने बताया कि इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू हुुआ था। जबकि पुल का लोकार्पण वर्ष 2005 में किया गया था। कहा कि पुल के गिरने की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही पुल के गिरने का खुलासा हो सकता है। पुल का निर्माण कार्य पंचकूला के रहने वाले ठेकेदार ने करवाया था।
लंबे रूट पर दौड़ने वाली एचआरटीसी की बसें चंबा-शिमला, चंबा-चामुंडा व चंबा मंडी अब सीधे रूट पर जाएंगी। पहले यह बसें वाया घोल्टी, सरोल भद्रम होकर परेल पुल से गुजरती थीं। लेकिन, अब पुल गिर जाने के चलते इस रूट पर गाड़ियां नहीं जाएंगी। आरएम चंबा वीके शर्मा ने बताया कि परेल पुल गिरने की वजह से वाया सरोल होने के बजाय बसें सीधे रूट पर जा रही हैं।