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Chamba News: मेपल, भोजपत्र के बाद अब वन्य प्राणी संपदा का अड्डा बनता जा रहा चंबा
Mon, 13 May 2024 10:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 13 May 2024 10:28 PM IST
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चंबा में वन विभाग की टीम द्वारा वन्य जीवों के अवशेषों के साथ पकड़े गये लोग।संवाद
चंबा। जिला चंबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन एवं वन्य प्राणी संपदा की अवैध तस्करी का अड्डा बनता जा रहा है। पहले मेपल तस्करी मामले में चीन से जुड़े तार मिले।
इसमें वन विभाग ने उत्तर प्रदेश में जाकर आरोपियों को भी दबोचा। इसके बाद भोजपत्र मामले में भी चीन और तिब्बत के साथ तस्करी के तार जुड़ने के सुबूत मिले। अब वन्य प्राणियों के अवशेषों का मामला सामने आया है। इस मामले में भी बाहरी राज्यों के तस्कर शामिल हैं। ये अन्य राज्यों के वन्य जीवों को मारकर उनके अंग धार्मिक और जादू टोना के साथ जोड़कर जिले के पर्यटन क्षेत्रों में सैलानियों को मुंह मांगे दामों पर बेच रहे हैं। इन आरोपियों की ओर से चंबा के जंगलों में भी वन्य जीवों के अवैध शिकार होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, इसको लेकर वन विभाग ने जांच तेज कर दी है। इस जांच के पूरा होने के उपरांत चंबा में अवैध शिकार होने की बात का खुलासा होगा।
जिस प्रकार से पिछले कुछ महीनों में मेपल, भोजपत्र और वन्य जीवों से जुड़े मामले चंबा में सामने आए हैं। उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चंबा वन संपदा की अवैध तस्करी का अड्डा बनता जा रहा है। इसलिए सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग को इस तस्करी को रोकने के लिए विशेष कदम उठाने की जरूरत है। चंबा जिले में कई दुर्लभ प्रजातियों के वन्य जीव पाए जाते हैं। इसके अलावा देवदार के सबसे घने जंगल भी प्रदेश में चंबा जिला में पाए जाते हैं। बर्फानी तेंदुए से लेकर भूरा भालू, कस्तूरी मृग और लोमड़ी के प्रमाण चंबा के जंगलों में मिल चुके हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों के तस्कर इन वन्य जीवों के अवैध शिकार को लेकर चंबा में भी अपनी निगाहें डाल रहे हैं।
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मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने बताया कि चंबा में जंगलों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। ड्रोन के जरिये भी जंगलों की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा ट्रैप कैमरे लगाकर भी वनों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग की मुस्तैदी के कारण ही ये तस्कर पकड़े गए हैं।
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इसमें वन विभाग ने उत्तर प्रदेश में जाकर आरोपियों को भी दबोचा। इसके बाद भोजपत्र मामले में भी चीन और तिब्बत के साथ तस्करी के तार जुड़ने के सुबूत मिले। अब वन्य प्राणियों के अवशेषों का मामला सामने आया है। इस मामले में भी बाहरी राज्यों के तस्कर शामिल हैं। ये अन्य राज्यों के वन्य जीवों को मारकर उनके अंग धार्मिक और जादू टोना के साथ जोड़कर जिले के पर्यटन क्षेत्रों में सैलानियों को मुंह मांगे दामों पर बेच रहे हैं। इन आरोपियों की ओर से चंबा के जंगलों में भी वन्य जीवों के अवैध शिकार होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, इसको लेकर वन विभाग ने जांच तेज कर दी है। इस जांच के पूरा होने के उपरांत चंबा में अवैध शिकार होने की बात का खुलासा होगा।
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जिस प्रकार से पिछले कुछ महीनों में मेपल, भोजपत्र और वन्य जीवों से जुड़े मामले चंबा में सामने आए हैं। उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चंबा वन संपदा की अवैध तस्करी का अड्डा बनता जा रहा है। इसलिए सरकार, जिला प्रशासन और वन विभाग को इस तस्करी को रोकने के लिए विशेष कदम उठाने की जरूरत है। चंबा जिले में कई दुर्लभ प्रजातियों के वन्य जीव पाए जाते हैं। इसके अलावा देवदार के सबसे घने जंगल भी प्रदेश में चंबा जिला में पाए जाते हैं। बर्फानी तेंदुए से लेकर भूरा भालू, कस्तूरी मृग और लोमड़ी के प्रमाण चंबा के जंगलों में मिल चुके हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों के तस्कर इन वन्य जीवों के अवैध शिकार को लेकर चंबा में भी अपनी निगाहें डाल रहे हैं।
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मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने बताया कि चंबा में जंगलों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। ड्रोन के जरिये भी जंगलों की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा ट्रैप कैमरे लगाकर भी वनों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग की मुस्तैदी के कारण ही ये तस्कर पकड़े गए हैं।