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एक्सरे करवाने के लिए लगानी पड़ रही 75 किमी की दौड़
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होली (चंबा)। होली उपमंडल के ग्रामीणों को एक्सरे और टेस्ट करवाने के लिए 40 से लेकर 75 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली में मरीजों को बीते एक माह से एक्सरे और लंबे अरसे से टेस्ट करवाने की सहूलियत नहीं मिल रही है। इसके चलते 14 पंचायतों की 15,000 आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकने को मजबूर है।
हैरानी की बात है कि तीन साल से अस्पताल में रिक्त चल रहे फार्मासिस्ट के पद तक को नहीं भरा जा सका है। इसके चलते स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक को ही मरीजों की स्वास्थ्य जांच के साथ उन्हें दवाइयां भी देनी पड़ रही हैं। सीएचसी होली की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण ग्रामीण परेशान हो चुके हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि उन्हें नेताओं की ओर से महज वोट बैंक के तौर पर ही इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हालात बेहद खराब हैं।
चंबा की लगानी पड़ रही दौड़
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे और रोगियों के विभिन्न प्रकार के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इससे मरीजों को यहां आने के बजाय भरमौर या चंबा का रुख करना पड़ रहा है।- रामप्रकाश, निवासी कुलेठ।
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मीलों दूर से पहुंचते हैं अस्पताल
बजोल, कलाह, न्याग्रां, क्वारसी और गरोंदा गांवों से मरीज दस से लेकर 30 किलोमीटर का सफर तय कर होली अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन यहां पर टेस्ट न होना मरीजों का मर्ज और बढ़ा रहा है। -प्रवीण कुमार, निवासी कुलेठ।
वोट बैंक के लिए किया जा रहा इस्तेमाल
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन कबायली क्षेत्र के तहत होली उपमंडल के लोगों को महज वोट बैंक तक ही सीमित रखा गया है। -महेश कुमार, होली।
तीन साल से फार्मासिस्ट का पद खाली
होली अस्पताल में तीन साल से फार्मासिस्ट का पद खाली पड़ा है। मरीजों को समय पर दवाइयां नहीं मिल रही हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में एक्सरे और विभिन्न टेस्ट नहीं हो रहे हैं। -ठाकुर सिंह, कुलेठ।
एक्सरे मशीन खराब होने और फार्मासिस्ट के खाली पद को भरने के बारे में विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. अंकित, बीएमओ होली।
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हैरानी की बात है कि तीन साल से अस्पताल में रिक्त चल रहे फार्मासिस्ट के पद तक को नहीं भरा जा सका है। इसके चलते स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सक को ही मरीजों की स्वास्थ्य जांच के साथ उन्हें दवाइयां भी देनी पड़ रही हैं। सीएचसी होली की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण ग्रामीण परेशान हो चुके हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि उन्हें नेताओं की ओर से महज वोट बैंक के तौर पर ही इस्तेमाल किया जा रहा है जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हालात बेहद खराब हैं।
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चंबा की लगानी पड़ रही दौड़
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्सरे और रोगियों के विभिन्न प्रकार के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। इससे मरीजों को यहां आने के बजाय भरमौर या चंबा का रुख करना पड़ रहा है।- रामप्रकाश, निवासी कुलेठ।
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मीलों दूर से पहुंचते हैं अस्पताल
बजोल, कलाह, न्याग्रां, क्वारसी और गरोंदा गांवों से मरीज दस से लेकर 30 किलोमीटर का सफर तय कर होली अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन यहां पर टेस्ट न होना मरीजों का मर्ज और बढ़ा रहा है। -प्रवीण कुमार, निवासी कुलेठ।
वोट बैंक के लिए किया जा रहा इस्तेमाल
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन कबायली क्षेत्र के तहत होली उपमंडल के लोगों को महज वोट बैंक तक ही सीमित रखा गया है। -महेश कुमार, होली।
तीन साल से फार्मासिस्ट का पद खाली
होली अस्पताल में तीन साल से फार्मासिस्ट का पद खाली पड़ा है। मरीजों को समय पर दवाइयां नहीं मिल रही हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में एक्सरे और विभिन्न टेस्ट नहीं हो रहे हैं। -ठाकुर सिंह, कुलेठ।
एक्सरे मशीन खराब होने और फार्मासिस्ट के खाली पद को भरने के बारे में विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. अंकित, बीएमओ होली।