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जुम्महार में भालू के आतंक से सहमे बच्चे नहीं गए स्कूल
Updated Mon, 13 Nov 2017 09:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जुम्महार(चंबा)। जुम्महार क्षेत्र के बच्चे सोमवार को स्कूल नहीं पहुंच पाएं। बच्चों के स्कूल न पहुंचने का मुख्य कारण जुम्महार में भालू का आतंक हैं। भालू ने यहां शनिवार को एक व्यक्ति पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया था। इस वजह से क्षेत्र के अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। यही वजह है कि सोमवार को स्कूल में ज्यादातर बच्चे नहीं पहुंचे। क्षेत्र के बच्चे सीनियर सेकेंडरी स्कूल लुड्डु, प्राथमिक पाठशाला जुम्हार में पढ़ते हैं। ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधीश चंबा के पास पहुंच कर दो दिनों के भीतर उन्हें भालू के आतंक से निजात दिलवाई न गई तो विवश होकर वे जिलाधीश कार्यालय के बाहर बच्चों के समेत धरने पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। वहीं, वन विभाग चंबा की ओर से एक विभागीय टीम गठित कर जुम्महार और आसपास के परिक्षेत्र में भालू को खदेड़ने के लिए भेजी गई है। गौरतलब हो कि जुम्महार में भालू ने आतंक मचा रखा है। एक सप्ताह में भालू के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। इस वजह से लोग बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। जुम्महार क्षेत्र के बच्चों को स्कूल जाने के लिए चार किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। जोकि जंगल के बीच से होकर जाता है। बच्चों की सहूलियत के लिए यहां पर कोई बस सुविधा भी नहीं है। ऐसे में भालू सहित अन्य जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है। हाल ही में एक व्यक्ति को भी भालू ने अपने हमले का शिकार बनाया। गनीमत यह रही कि हमले में व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसी आतंक से निजात दिलवाने के लिए ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को उपायुक्त सुदेश मोख्टा से मिला। ग्रामीण राहुल, रविंद्र कुमार, छिंदू, आशीष, नेहा, नवीन कुमार, रोहित ठाकुुर, नवेंद्र, लक्की और यदिका ने बताया कि जब तक भालू के आतंक से लोगों को निजात नहीं मिल जाती। तब तक कोई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। उन्होंने कहा कि उपरोक्त चार किलोमीटर के रास्ते पर अगर वाहन सुविधा शुरू की जाती है तो बच्चों को स्कूल आने जाने में सुविधा मिलेगी। इससे बच्चों को जंगली जानवरों के आतंक से भी निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि जुम्महार क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमले पहले भी सामने आ चुके हैं। मगर इन हमलों से भी प्रशासन और विभाग ने अभी तक कोई सबक नहीं लिया। जो ग्रामीणों के लिए अब परेशानी बन गई है। उन्होंने क्षेत्र को भालू के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग ने ग्रामीणों केे ज्वलंत समस्या को देखते हुए एक संयुक्त टीम का गठन किया है। इस टीम में दो आरओ, दो बीओ, दो वन रक्षकों को शामिल किया गया है।
इनसेट
वन विभाग के डीएफओ संजीव शर्मा ने कहा कि जुम्महार पंचायत के रिहायशी इलाके से भालू को खदेड़ने के लिए विभागीय टीम गठित कर भेजी दी गई है। उन्होंने कहा कि टीम ने भालू को रिहायशी परिक्षेत्र से दूर खदेड़ा जाएगा।
संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई के दिए निर्देश : जिलाधीश चंबा
उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने बताया कि जुम्महार के ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल उनके साथ मिला है। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जुम्महार(चंबा)। जुम्महार क्षेत्र के बच्चे सोमवार को स्कूल नहीं पहुंच पाएं। बच्चों के स्कूल न पहुंचने का मुख्य कारण जुम्महार में भालू का आतंक हैं। भालू ने यहां शनिवार को एक व्यक्ति पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया था। इस वजह से क्षेत्र के अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। यही वजह है कि सोमवार को स्कूल में ज्यादातर बच्चे नहीं पहुंचे। क्षेत्र के बच्चे सीनियर सेकेंडरी स्कूल लुड्डु, प्राथमिक पाठशाला जुम्हार में पढ़ते हैं। ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधीश चंबा के पास पहुंच कर दो दिनों के भीतर उन्हें भालू के आतंक से निजात दिलवाई न गई तो विवश होकर वे जिलाधीश कार्यालय के बाहर बच्चों के समेत धरने पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे। वहीं, वन विभाग चंबा की ओर से एक विभागीय टीम गठित कर जुम्महार और आसपास के परिक्षेत्र में भालू को खदेड़ने के लिए भेजी गई है। गौरतलब हो कि जुम्महार में भालू ने आतंक मचा रखा है। एक सप्ताह में भालू के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। इस वजह से लोग बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं। जुम्महार क्षेत्र के बच्चों को स्कूल जाने के लिए चार किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। जोकि जंगल के बीच से होकर जाता है। बच्चों की सहूलियत के लिए यहां पर कोई बस सुविधा भी नहीं है। ऐसे में भालू सहित अन्य जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है। हाल ही में एक व्यक्ति को भी भालू ने अपने हमले का शिकार बनाया। गनीमत यह रही कि हमले में व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसी आतंक से निजात दिलवाने के लिए ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को उपायुक्त सुदेश मोख्टा से मिला। ग्रामीण राहुल, रविंद्र कुमार, छिंदू, आशीष, नेहा, नवीन कुमार, रोहित ठाकुुर, नवेंद्र, लक्की और यदिका ने बताया कि जब तक भालू के आतंक से लोगों को निजात नहीं मिल जाती। तब तक कोई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। उन्होंने कहा कि उपरोक्त चार किलोमीटर के रास्ते पर अगर वाहन सुविधा शुरू की जाती है तो बच्चों को स्कूल आने जाने में सुविधा मिलेगी। इससे बच्चों को जंगली जानवरों के आतंक से भी निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि जुम्महार क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमले पहले भी सामने आ चुके हैं। मगर इन हमलों से भी प्रशासन और विभाग ने अभी तक कोई सबक नहीं लिया। जो ग्रामीणों के लिए अब परेशानी बन गई है। उन्होंने क्षेत्र को भालू के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। वन विभाग ने ग्रामीणों केे ज्वलंत समस्या को देखते हुए एक संयुक्त टीम का गठन किया है। इस टीम में दो आरओ, दो बीओ, दो वन रक्षकों को शामिल किया गया है।
इनसेट
वन विभाग के डीएफओ संजीव शर्मा ने कहा कि जुम्महार पंचायत के रिहायशी इलाके से भालू को खदेड़ने के लिए विभागीय टीम गठित कर भेजी दी गई है। उन्होंने कहा कि टीम ने भालू को रिहायशी परिक्षेत्र से दूर खदेड़ा जाएगा।
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संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई के दिए निर्देश : जिलाधीश चंबा
उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने बताया कि जुम्महार के ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल उनके साथ मिला है। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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