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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   CAG Report: Misuse of Disaster Relief Fund; Centre Withholds Aid Worth 61 Crore;Cases of Illegal Mining

कैग रिपोर्ट: आपदा राहत कोष का दुरुपयोग, केंद्र ने रोकी 61 करोड़ की मदद; अवैध खनन के 40,000 से अधिक मामले

Mon, 30 Mar 2026 09:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 30 Mar 2026 09:32 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट के अनुसार 2018-23 के बीच प्रदेश में अवैध खनन के 40,757 मामले दर्ज किए गए। 

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CAG Report: Misuse of Disaster Relief Fund; Centre Withholds Aid Worth 61 Crore;Cases of Illegal Mining
कैग। - फोटो : संवाद

विस्तार

 उद्योग विभाग की लापरवाही के कारण हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन का काला कारोबार फल-फूल रहा है। सोमवार को  हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट के अनुसार 2018-23 के बीच प्रदेश में अवैध खनन के 40,757 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बिजली खपत के आधार पर रॉयल्टी का सही आकलन नहीं होने से 27 लीज धारकों से 1.81 करोड़ की कम वसूली हुई। वहीं सोलन और ऊना जैसे सीमावर्ती जिलों में अवैध परिवहन रोकने के लिए बनाई गई चेक-पोस्ट भी स्टाफ की कमी के कारण सफेद हाथी साबित हो रही हैं ।

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राज्य ने बचत खातों में डंप किए 122 करोड़
आपदा प्रभावितों को समय पर मदद देने के बजाय प्रदेश सरकार नियमों की अनदेखी कर रही है। कैग ने पाया कि एसडीआरएफ के फंड का सही उपयोग नहीं होने के कारण केंद्र सरकार ने 61.07 करोड़ रुपये की सहायता रोक ली है। वहीं नियमों के विरुद्ध 122.27 करोड़ की राशि बचत खातों में रखी गई, जिससे ब्याज का भारी नुकसान हुआ। ऑडिट में यह भी सामने आया कि आपदा राहत के लिए मिले फंड का इस्तेमाल नए निर्माण और सामान्य मरम्मत जैसे अनधिकृत कार्यों पर किया गया।

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अधूरी सिंचाई योजनाएं और करोड़ों की बर्बादी
शिमला। जल शक्ति विभाग की खराब योजना के कारण किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, जांचे गए क्षेत्रों में 163 स्वीकृत योजनाओं में से केवल 72 ही पूरी हो सकीं। देरी के कारण 18 योजनाओं की लागत में 8.83 करोड़ की बढ़ोतरी हो गई। इसके अलावा, नियमों को ताक पर रखकर ई-टेंडरिंग से बचने के लिए 48.25 करोड़ के कार्यों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया, जो कि एक बड़ी वित्तीय अनियमितता है ।

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वन विभाग की लापरवाही से 1.33 करोड़ का चूना
 हिमाचल प्रदेश वन विभाग की ओर से कैंपा (प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) फंड के तहत नेट प्रेजेंट वैल्यू के गलत आकलन से सरकारी खजाने को 1.33 करोड़ का नुकसान होने की संभावना जताई गई है। ऑडिट में पाया गया कि चंबा सर्कल के मामलों में वनों के वर्गीकरण में गलती की गई, जिससे ऊंची दरों के बजाय कम दरों पर वसूली हुई। साथ ही, कई सड़कों का निर्माण बिना पूर्व अनुमति के किया गया, जो वन संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

3,324.53 करोड़ रुपये की राशि के 2,521 उपयोगिता प्रमाणपत्र
 2023-24 तक प्रतीक्षित उपयोगिता प्रमाणपत्रों की संख्या 1,375 थी और 2024-25 तक इनकी संख्या 1,146 थी। 2023-24 तक ये 1,176.48 करोड़ और 2024-25 तक 2,148.05 करोड़ रुपये के प्रतीक्षित रहे। कुल 2,521 उपयोगिता प्रमाणपत्रों पर 3,324.53 करोड़ रुपये की राशि का व्यय होना था। 2024-25 में निर्धारित तिथि तक तीन और 38.61 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र ही दिए गए।

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