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Bilaspur News: मजारी स्कूल के बच्चों ने किया फिश सीड फार्म दयोली का भ्रमण
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दयोली में फिश सीड फार्म के भ्रमण पर पहुंचे मजारी स्कूल के विद्यार्थी। स्रोत: स्कूल प्रबंधन
-स्कूल पहुंच कर अध्यापकों के साथ साझा किए अनुभव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय उच्च पाठशाला मजारी के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत संचालित प्री-वोकेशनल एजुकेशनल एक्सपोजर स्कीम के अंतर्गत जिला बिलासपुर के दयोली स्थित एशिया के सबसे बड़े फिश सीड फार्म का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मछली बीज उत्पादन की जटिल प्रक्रिया, पालन-पोषण की विधियों तथा इस व्यवसाय से जुड़े रोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
सीड फार्म में विद्यार्थियों ने जाना कि किस प्रकार विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के बीज तैयार कर देश-विदेश में आपूर्ति की जाती है। साथ ही सरकार द्वारा संचालित मत्स्य पालन संबंधी योजनाओं और इस क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। अगले दिन विद्यार्थियों ने अपने अनुभव विद्यालय प्रार्थना सभा में साझा किए। प्रधानाचार्य सुरजीत ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को साकार करने में सहायक सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से ही भारत उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय उच्च पाठशाला मजारी के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत संचालित प्री-वोकेशनल एजुकेशनल एक्सपोजर स्कीम के अंतर्गत जिला बिलासपुर के दयोली स्थित एशिया के सबसे बड़े फिश सीड फार्म का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मछली बीज उत्पादन की जटिल प्रक्रिया, पालन-पोषण की विधियों तथा इस व्यवसाय से जुड़े रोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
सीड फार्म में विद्यार्थियों ने जाना कि किस प्रकार विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के बीज तैयार कर देश-विदेश में आपूर्ति की जाती है। साथ ही सरकार द्वारा संचालित मत्स्य पालन संबंधी योजनाओं और इस क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया। अगले दिन विद्यार्थियों ने अपने अनुभव विद्यालय प्रार्थना सभा में साझा किए। प्रधानाचार्य सुरजीत ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को साकार करने में सहायक सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से ही भारत उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
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