{"_id":"6aa993561eb439f8c50b82a4","slug":"students-shared-their-views-on-the-importance-of-hindi-in-the-english-class-bilaspur-news-c-92-1-bls1002-167778-2026-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: अंग्रेजी की कक्षा में हिंदी के महत्व पर विद्यार्थियों ने रखे विचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: अंग्रेजी की कक्षा में हिंदी के महत्व पर विद्यार्थियों ने रखे विचार
विज्ञापन
बिलासपुर कॉलेज में हिंदी दिवस पर आयोजित विशेष गतिविधि में भाग लेते हुए विद्यार्थी। स्रोत: कॉलेज
हिंदी दिवस पर बिलासपुर कॉलेज की प्रो. डॉ नम्रता ने शुरू की अनूठी पहल
विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति सम्मान एवं रुचि विकसित करने के लिए किया प्रोत्साहित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर में हिंदी दिवस के अवसर पर प्रो. डॉ. नम्रता पठानिया ने नई पहल करते हुए अंग्रेजी की कक्षा में हिंदी भाषा के महत्व और उपयोगिता को लेकर विशेष गतिविधि का आयोजन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने हिंदी के गौरव, समृद्ध साहित्य और भारतीय संस्कृति में इसके योगदान पर अपने विचार साझा किए।
विद्यार्थियों ने स्वरचित रचनाओं के माध्यम से हिंदी के प्रति प्रेम, गर्व और बदलते भाषायी परिवेश को लेकर अपनी चिंताओं को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया। श्रेया, आभा चंदेल, दीपिका शर्मा, मुस्कान, निकिता, सोनाली भारती, ज्योति, समीर, सुकृती, सीमा, शिवानी, सानिया चंदन, निशा, मुस्कान रनौत, अंकिता, नीलाक्षी और शिवांश शुक्ला ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
विद्यार्थियों की रचनाओं में मैंने हिंदी को छोड़ दिया था, पर क्या हिंदी ने मुझे छोड़ा जैसी पंक्तियों के माध्यम से आत्ममंथन का संदेश दिया गया। वहीं जन-जन की भाषा है हिंदी, भारत की आशा है हिंदी जैसी पंक्तियों ने हिंदी के प्रति सामूहिक गौरव को स्वर दिया। विद्यार्थियों ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव का माध्यम है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ने, लिखने और बोलने के साथ ही इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही रचनात्मक लेखन के माध्यम से उनकी अभिव्यक्ति को भी प्रोत्साहन मिला। इस अवसर पर डॉ. नम्रता पठानिया ने अपनी स्वरचित कविता मातृभाषा भी प्रस्तुत की। प्राचार्य डॉ. पीएस कटवाल ने कहा कि नए विचारों और रचनात्मक चिंतन को लेखन का रूप देना अभिनव सोच के बेहतर क्रियान्वयन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अभिव्यक्ति-कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कॉलेज प्रशासन ने इस पहल के लिए डॉ. नम्रता पठानिया का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति सम्मान एवं रुचि विकसित करने के लिए किया प्रोत्साहित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर में हिंदी दिवस के अवसर पर प्रो. डॉ. नम्रता पठानिया ने नई पहल करते हुए अंग्रेजी की कक्षा में हिंदी भाषा के महत्व और उपयोगिता को लेकर विशेष गतिविधि का आयोजन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने हिंदी के गौरव, समृद्ध साहित्य और भारतीय संस्कृति में इसके योगदान पर अपने विचार साझा किए।
विद्यार्थियों ने स्वरचित रचनाओं के माध्यम से हिंदी के प्रति प्रेम, गर्व और बदलते भाषायी परिवेश को लेकर अपनी चिंताओं को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया। श्रेया, आभा चंदेल, दीपिका शर्मा, मुस्कान, निकिता, सोनाली भारती, ज्योति, समीर, सुकृती, सीमा, शिवानी, सानिया चंदन, निशा, मुस्कान रनौत, अंकिता, नीलाक्षी और शिवांश शुक्ला ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
विज्ञापन
विद्यार्थियों की रचनाओं में मैंने हिंदी को छोड़ दिया था, पर क्या हिंदी ने मुझे छोड़ा जैसी पंक्तियों के माध्यम से आत्ममंथन का संदेश दिया गया। वहीं जन-जन की भाषा है हिंदी, भारत की आशा है हिंदी जैसी पंक्तियों ने हिंदी के प्रति सामूहिक गौरव को स्वर दिया। विद्यार्थियों ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक जुड़ाव का माध्यम है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ने, लिखने और बोलने के साथ ही इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही रचनात्मक लेखन के माध्यम से उनकी अभिव्यक्ति को भी प्रोत्साहन मिला। इस अवसर पर डॉ. नम्रता पठानिया ने अपनी स्वरचित कविता मातृभाषा भी प्रस्तुत की। प्राचार्य डॉ. पीएस कटवाल ने कहा कि नए विचारों और रचनात्मक चिंतन को लेखन का रूप देना अभिनव सोच के बेहतर क्रियान्वयन का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अभिव्यक्ति-कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कॉलेज प्रशासन ने इस पहल के लिए डॉ. नम्रता पठानिया का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन