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Bilaspur News: भगवान श्रीकृष्ण के हाथों कंस के वध की कथा सुनाई

Fri, 04 Apr 2025 11:45 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 04 Apr 2025 11:45 PM IST
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The story of the killing of Kansa by Lord Krishna was narrated
झंडूता की ग्राम पंचायत के जेजवीं के गांव बैंथरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में उपस्थित भक्त ज
-जेजवी के बैंथरी गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विधानसभा क्षेत्र झंडूता की ग्राम पंचायत जेजवी के गांव बैंथरी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक रसिक ने भगवान श्रीकृष्ण के हाथों कंस के वध का प्रसंग सुनाया।

उन्होंने कहा कि जब कंस के पाप अत्यधिक बढ़ गए तो सभी भयभीत हो गए। ऐसे में कंस को भी भय था कि उसके प्राणों का घातक जन्म ले चुका है। शिशु रूप कान्हा को मारने के लिए कंस ने कागासुर, बकासुर और पूतना जैसे राक्षसों को भेजा, लेकिन ईश्वर ने उनका वध कर दिया। कंस ने अपने षड्यंत्र की पूर्ति करने के लिए एक मल्ल युद्ध रखा, जिसमें आसपास के इलाके के पहलवानों को सादर आमंत्रित किया। इस मल्ल युद्ध में शिव धनुष को भी रखा गया। नंद बाबा अपने 11 वर्षीय कन्हैया और बलराम को लेकर युद्ध देखने के लिए पहुंच गए। वहां पर सबसे पहले इन बालकों ने जब शिव धनुष तोड़ा तो कंस का भय और बढ़ गया। कंस को मालूम था कि जो इस धनुष को तोड़ेगा वहीं, उसका काल बनेगा। मल्ल युद्ध भूमि पर चारों ओर बड़े-बड़े दुर्दांत योद्धा कंस ने तैनात कर दिए और स्वयं सबसे ऊपर मचान पर बैठकर युद्ध देखने लगा। इतने में नंद बाबा ने कहा कि युद्ध तो बराबर वालों में होता है फिर बच्चों के साथ इतने बड़े योद्धाओं को लड़ाना तर्कसंगत नहीं है। इतने में कंस के सेनापति ने कहा कि जो पूतना तक का वध कर सकता है। उसे अब भय क्यों लग रहा है। कान्हा और बलराम ने नंद बाबा से शांत होकर युद्ध की गति का झुकाव देखने को कहा। इन दोनों नौनिहालों ने कंस के सभी योद्धाओं को मार दिया। इसी दौरान एक कुबलिया पीड़ हाथी जिसको मदिरापान करवाया गया था, उसको भी कान्हा से लड़ने के लिए भेजा। इन दोनों भ्राताओं ने इस मदमस्त हाथी को पूंछ से पकड़कर आसमान में फेंक दिया। इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने एक छलांग लगाई और कंस को पकड़ा और भूमि पर पटक दिया। उन्होंने कंस को उसके बालों से पकड़ा तो कंस मृत्यु नजदीक देख जीवन की भिक्षा मांगने लगा। भगवान कृष्ण ने कहा कि जिसे वह पकड़ लेते हैं उसे वह उद्धार करके ही छोड़ते हैं। आप तो मामा हो अर्थात मां तो एक है और ज्यादा स्नेह और प्रेम का मतलब मामा होता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मामा आपने मेरी मां को केसों से पकड़कर उन्हें यातनाएं दीं थीं तो आप को भी उन्हीं यातनाओं से गुजरना होगा। भगवान ने एक मुष्टिका के प्रहार से कंस को प्राणमुक्त कर दिया। पंडित रसिक ने बताया कि पापी कितना भी बलशाली क्यों न हो उसके पापों का अंत अवश्य होता है।
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