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Bilaspur News: ग्राम पंचायतों में बढ़ता कुत्तों का खतरा, प्रशासन व पंचायतें बेपरवाह

Mon, 10 Nov 2025 10:47 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 10 Nov 2025 10:47 PM IST
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The growing threat of dogs in village panchayats, the administration and panchayats are careless.
लोगों में बढ़ रहा डर, बच्चों और बुजुर्गों पर कई बार हो चुके हमले
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न तो पालतू कुत्तों का होता है पंजीकरण, न ही लावारिस कुत्तों की संख्या का है कोई आंकड़ा

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। ग्राम पंचायतों में लावारिस कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन इस दिशा में न तो पंचायत प्रतिनिधि गंभीर दिखाई दे रहे हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी कोई ठोस कदम उठा रहे हैं। गांवों में आए दिन लावारिस कुत्तों के झुंड लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। कई जगह इन कुत्तों ने राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया, बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है।
घुमारवीं शहर सहित आसपास के क्षेत्रों दधोल, डंगार, लेठवीं, भराड़ी, हटवाड़, निहारी और बरठीं में पिछले कुछ महीनों में कई लोग लावारिस कुत्तों के हमलों का शिकार हो चुके हैं। कई घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा, जबकि गंभीर मामलों में जिला अस्पताल तक रेफर करना पड़ा। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पंचायत स्तर पर स्थिति यह है कि न तो पालतू कुत्तों का पंजीकरण किया गया है और न ही लावारिस कुत्तों की संख्या का कोई आंकड़ा तैयार किया गया है। पंचायत अधिनियम के अनुसार पालतू जानवरों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है, ताकि बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके, लेकिन अधिकांश पंचायतें इस दिशा में उदासीन हैं। लोगों का कहना है कि कई बार पंचायतों और विभागीय अधिकारियों को कुत्तों के आतंक के बारे में अवगत करवाया गया, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। गांवों में स्कूलों के बाहर और गलियों में ये कुत्ते खुलेआम घूमते हैं। बच्चों को स्कूल जाने में डर लगता है, वहीं बुजुर्ग और महिलाएं भी इनके खौफ में हैं। कई बार ये कुत्ते झुंड बनाकर खेतों में काम कर रहे किसानों या राहगीरों पर हमला कर देते हैं।
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पशु चिकित्सा विभाग की ओर से भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लावारिस कुत्तों के वैक्सीनेशन और नसबंदी को लेकर अभी तक किसी भी क्षेत्र में कोई व्यापक अभियान नहीं चलाया गया है। सरकार की ओर से दिए गए निर्देश केवल कागजों तक सीमित हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि प्रत्येक पंचायत में पालतू व लावारिस कुत्तों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पशु चिकित्सकों की टीम बनाकर गांव-गांव जाकर लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कराया जाए। यदि पंचायतें और संबंधित विभाग समय रहते सक्रिय नहीं हुए, तो लावारिस कुत्तों का यह खतरा किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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