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Bilaspur News: माता सती चरित्र का किया बखान
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झंडूता के ठाकुर द्वारा मंदिर नरसिंह में आयोजित रामकथा में मौजूद श्रद्धालु। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश (बिलासपुर)। स्थानीय ठाकुरद्वारा मंदिर नरसिंह में राम कथा के दूसरे दिन आचार्य संदीपन ने भगवान राम के परिवार का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने बताया कि श्रीराम अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के ज्येष्ठ पुत्र थे।
उन्होंने कहा कि राजा दशरथ की तीन पत्नियां कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा थीं। उनसे उनके चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न हुए। कथा में यह भी बताया कि श्रीराम की एक बहन भी थीं, जिनका नाम शांता था। आचार्य संदीपन ने बताया कि भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जीवन में उच्च आदर्शों का पालन किया। उन्होंने अयोध्या के राजा के रूप में धर्म और न्याय की स्थापना की। कथा में माता सती चरित्र पर भी प्रकाश डाला गया। आचार्य ने बताया कि माता सती भगवान शिव की पत्नी और प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, लेकिन उनके पिता दक्ष शिव को पसंद नहीं करते थे। राम कथा को सुनने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने कथा का आनंद लिया और भगवान श्रीराम के गुणगान गाए। आयोजन स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
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ऋषिकेश (बिलासपुर)। स्थानीय ठाकुरद्वारा मंदिर नरसिंह में राम कथा के दूसरे दिन आचार्य संदीपन ने भगवान राम के परिवार का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने बताया कि श्रीराम अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के ज्येष्ठ पुत्र थे।
उन्होंने कहा कि राजा दशरथ की तीन पत्नियां कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा थीं। उनसे उनके चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न हुए। कथा में यह भी बताया कि श्रीराम की एक बहन भी थीं, जिनका नाम शांता था। आचार्य संदीपन ने बताया कि भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जीवन में उच्च आदर्शों का पालन किया। उन्होंने अयोध्या के राजा के रूप में धर्म और न्याय की स्थापना की। कथा में माता सती चरित्र पर भी प्रकाश डाला गया। आचार्य ने बताया कि माता सती भगवान शिव की पत्नी और प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, लेकिन उनके पिता दक्ष शिव को पसंद नहीं करते थे। राम कथा को सुनने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने कथा का आनंद लिया और भगवान श्रीराम के गुणगान गाए। आयोजन स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
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