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Bilaspur News: लोक धुनों पर झूमे दर्शक, मंच पर दिखी भारत की विविधता
Mon, 27 Oct 2025 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 27 Oct 2025 11:24 PM IST
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बिलासपुर के बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसर में आयोजित अंतरराज्यीय लोक सांस्कृतिक उत्सव में प्रस्त
मुख्य अतिथि बोले, लोक संस्कृति समाज को जोड़ती है, सड़क सुरक्षा भी सामाजिक जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसर बिलासपुर में चल रहे अंतरराज्यीय लोक सांस्कृतिक उत्सव के तीसरे दिन लोक धुनों और नृत्यों की ऐसी रंगत बिखरी कि पूरा सभागार लोक जीवन की सुगंध से महक उठा। मां वैष्णो सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों ने जब मंच संभाला, तो दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी और पूरा परिसर झूमने लगा।
मंच पर प्रस्तुत विविध लोक कलाओं ने यह एहसास कराया कि भाषा, लय और बोली भले अलग हों, लेकिन संस्कृति की धड़कन एक ही है। कलाकारों के हर कदम, हर मुस्कान और हर भाव में भारतीयता की झलक दिखी। दर्शक हर प्रस्तुति पर बार-बार तालियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर करते रहे मानो हर गीत और नृत्य में अपनत्व और लोक गौरव की कहानी कही जा रही हो। मुख्यातिथि क्षेत्रीय प्रबंधन अधिकारी बिलासपुर राजेश कौशल ने कहा कि यह उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोक विरासत के पुनर्जागरण का पर्व है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोक संस्कृति समाज को जोड़ती है, उसी प्रकार सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन भी सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने सभी से अपील की कि सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित जीवन की नींव हैं। हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों का पालन हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। इस अवसर पर विशेष अतिथि अनूप सांख्यान, सोनू ठाकुर (समाजसेवी), जतिन ठाकुर और रविन्द्र चंदेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी नीलम चंदेल, इंद्र सिंह चंदेल, अध्यक्ष हिम कला संगम सतपाल शर्मा, प्रदीप कुमार, मुकेश शर्मा, भगत सिंह, दौलत सिंह ठाकुर, आशीष राणा, कृष्ण लाल ठाकुर, रमेश, रघुराज, हरि कृष्ण, नरेश चौधरी, यशपाल, परम देव, पदम देव, दिनेश ठाकुर, नरेंद्र दत्त शर्मा, गायत्री शर्मा, नरेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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बिलासपुर। बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसर बिलासपुर में चल रहे अंतरराज्यीय लोक सांस्कृतिक उत्सव के तीसरे दिन लोक धुनों और नृत्यों की ऐसी रंगत बिखरी कि पूरा सभागार लोक जीवन की सुगंध से महक उठा। मां वैष्णो सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों ने जब मंच संभाला, तो दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी और पूरा परिसर झूमने लगा।
मंच पर प्रस्तुत विविध लोक कलाओं ने यह एहसास कराया कि भाषा, लय और बोली भले अलग हों, लेकिन संस्कृति की धड़कन एक ही है। कलाकारों के हर कदम, हर मुस्कान और हर भाव में भारतीयता की झलक दिखी। दर्शक हर प्रस्तुति पर बार-बार तालियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर करते रहे मानो हर गीत और नृत्य में अपनत्व और लोक गौरव की कहानी कही जा रही हो। मुख्यातिथि क्षेत्रीय प्रबंधन अधिकारी बिलासपुर राजेश कौशल ने कहा कि यह उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोक विरासत के पुनर्जागरण का पर्व है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोक संस्कृति समाज को जोड़ती है, उसी प्रकार सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन भी सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने सभी से अपील की कि सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित जीवन की नींव हैं। हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों का पालन हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। इस अवसर पर विशेष अतिथि अनूप सांख्यान, सोनू ठाकुर (समाजसेवी), जतिन ठाकुर और रविन्द्र चंदेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी नीलम चंदेल, इंद्र सिंह चंदेल, अध्यक्ष हिम कला संगम सतपाल शर्मा, प्रदीप कुमार, मुकेश शर्मा, भगत सिंह, दौलत सिंह ठाकुर, आशीष राणा, कृष्ण लाल ठाकुर, रमेश, रघुराज, हरि कृष्ण, नरेश चौधरी, यशपाल, परम देव, पदम देव, दिनेश ठाकुर, नरेंद्र दत्त शर्मा, गायत्री शर्मा, नरेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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