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141 सांसदों की निलंबन लोकतंत्र के लिए घातक : सांख्यान
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जैसे ही लोकसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया सामने आ रहा है। संसद में जिस तरह से बेरोजगार अंदर घुसे वह केंद्र सरकार के लिए शर्मसार करने वाली घटना है।
संसद में मुद्दे उठाने पर विपक्ष के सांसदों का निलंबन लोकतंत्र के लिए घातक है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता संदीप सांख्यान ने कहा कि देश में दो दिन पहले देश के सांसदों को जिस तरह से निलंबित किया गया है वह काला दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। कहा कि मंगलवार को निलंबित किए गए सांसदों को मिलाकर अब तक निलंबित हुए सांसदों की कुल संख्या 141 पर पहुंच गई है। इनमें 95 लोकसभा और 46 राज्यसभा के सांसद हैं। इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का निलंबन कभी नहीं हुआ था। जो लोकतंत्र में असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार चाहती है कि वह विपक्ष मुक्त हो, इसलिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है। केंद्र की सरकार अधिनायकवादी रवैया अपना रही है, जो देश की जनता को कभी स्वीकार नहीं हो सकता। केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंटा है। संसद में दो लोगों के घुस आने की घटना के बाद इस पर जब सांसदों ने बहस की मांग की तो निलंबन का कदम उठाना अति अलोकतांत्रिक है। भाजपा मनमानी पर उतर आई है, वह बेहद अहम बिलों को बिना बहस के मनमाने ढंग से पारित कराना चाहती थी, इसलिए वह सदन में विपक्षी सांसदों को नहीं देखना चाहती है। यदि संसद में बहस ही नहीं होगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रहेगा। यह देश के संविधान से भी खिलवाड़ है और जनभावनाओं से भी खिलवाड़ है।
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बिलासपुर। जैसे ही लोकसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया सामने आ रहा है। संसद में जिस तरह से बेरोजगार अंदर घुसे वह केंद्र सरकार के लिए शर्मसार करने वाली घटना है।
संसद में मुद्दे उठाने पर विपक्ष के सांसदों का निलंबन लोकतंत्र के लिए घातक है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता संदीप सांख्यान ने कहा कि देश में दो दिन पहले देश के सांसदों को जिस तरह से निलंबित किया गया है वह काला दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। कहा कि मंगलवार को निलंबित किए गए सांसदों को मिलाकर अब तक निलंबित हुए सांसदों की कुल संख्या 141 पर पहुंच गई है। इनमें 95 लोकसभा और 46 राज्यसभा के सांसद हैं। इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का निलंबन कभी नहीं हुआ था। जो लोकतंत्र में असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार चाहती है कि वह विपक्ष मुक्त हो, इसलिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है। केंद्र की सरकार अधिनायकवादी रवैया अपना रही है, जो देश की जनता को कभी स्वीकार नहीं हो सकता। केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंटा है। संसद में दो लोगों के घुस आने की घटना के बाद इस पर जब सांसदों ने बहस की मांग की तो निलंबन का कदम उठाना अति अलोकतांत्रिक है। भाजपा मनमानी पर उतर आई है, वह बेहद अहम बिलों को बिना बहस के मनमाने ढंग से पारित कराना चाहती थी, इसलिए वह सदन में विपक्षी सांसदों को नहीं देखना चाहती है। यदि संसद में बहस ही नहीं होगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रहेगा। यह देश के संविधान से भी खिलवाड़ है और जनभावनाओं से भी खिलवाड़ है।
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