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मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत श्रम कानून जरूरी : धर्माणी
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घुमारवीं में आयोजित प्रदेश इंटक बैठक में मौजूद मंत्री व इंटक सदस्य। स्रोत: डीपीआर
घुमारवीं में इंटक की बैठक में बोले तकनीकी शिक्षा मंत्री, चार श्रम संहिताओं का किया विरोध
कहा-श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और रोजगार संरक्षण को मिले प्राथमिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और श्रमिक संगठनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। वह वीरवार को घुमारवीं में प्रदेश इंटक की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
धर्माणी ने कहा कि श्रम कल्याण बोर्ड के माध्यम से कामगारों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। पात्र श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में ट्रेड यूनियनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं बनाए जाने का विरोध किया। कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव करते समय श्रमिकों के हित, रोजगार की सुरक्षा, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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मंत्री ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना समय की जरूरत है। मजदूरों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इस दौरान श्रीलंका और नेपाल से आए अधिकारियों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।
बैठक में कामगार कल्याण बोर्ड अध्यक्ष नरदेव कंवर, इंटक प्रदेश अध्यक्ष एवं नालागढ़ विधायक बावा हरदीप सिंह, बिहार इंटक अध्यक्ष सीपी सिंह, जगत राम शर्मा, इंटक महासचिव उमेश शर्मा समेत विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी और श्रमिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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कहा-श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और रोजगार संरक्षण को मिले प्राथमिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और श्रमिक संगठनों की प्राथमिकता होनी चाहिए। वह वीरवार को घुमारवीं में प्रदेश इंटक की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
धर्माणी ने कहा कि श्रम कल्याण बोर्ड के माध्यम से कामगारों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। पात्र श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में ट्रेड यूनियनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं बनाए जाने का विरोध किया। कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव करते समय श्रमिकों के हित, रोजगार की सुरक्षा, उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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मंत्री ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना समय की जरूरत है। मजदूरों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इस दौरान श्रीलंका और नेपाल से आए अधिकारियों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।
बैठक में कामगार कल्याण बोर्ड अध्यक्ष नरदेव कंवर, इंटक प्रदेश अध्यक्ष एवं नालागढ़ विधायक बावा हरदीप सिंह, बिहार इंटक अध्यक्ष सीपी सिंह, जगत राम शर्मा, इंटक महासचिव उमेश शर्मा समेत विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी और श्रमिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।