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Bilaspur News: अंधड़ ने बर्बाद की किसानों की मेहनत, 75 फीसदी मक्की की फसल तबाह

Mon, 24 Aug 2026 12:41 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 12:41 AM IST
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Storm ruins farmers' hard work; 75% of maize crop destroyed.
तूफान ने कपाहड़ा में बिछी मक्की की फसल। संवाद
कपाहड़ा पंचायत के कई गांवों में तेज हवाओं से खेतों में बिछी फसल,मुआवजा देने की उठाई मांग
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समलोहल, कपाहड़ा, धीणवी, चडोल, कुरनाई, चलारन और कंगड़ानी समेत कई गांव प्रभावित

संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कपाहड़ा के कई गांवों में अंधड़ ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। समलोहल, कपाहड़ा, धीणवी, चडोल, कुरनाई, चलारन, कंगड़ानी सहित आसपास के गांवों में करीब 75 प्रतिशत मक्की की फसल तबाह होने का दावा किया गया है। तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी मक्की जमीन पर बिछ गई। फसल खराब होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पंचायत प्रधान विनय शर्मा ने कहा कि किसान सालभर मेहनत कर फसल तैयार करता है, लेकिन कभी लावारिस पशुओं और जंगली जानवरों से फसल बचाने की चुनौती रहती है तो कभी प्राकृतिक आपदा मेहनत पर पानी फेर देती है। इस बार तेज तूफान से मक्की की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, दवाइयों, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर किसानों का खर्च बढ़ा है। ऐसे में फसल खराब होने से किसानों की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है। पंचायत प्रधान ने प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से प्रभावित गांवों में मक्की की फसल को हुए नुकसान का जल्द मौके पर निरीक्षण करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम खेतों में हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों की रिपोर्ट तैयार करे और पात्र किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में फसल बर्बाद होने के बाद उनकी परेशानी और बढ़ गई है। प्रशासन को औपचारिकताओं में समय गंवाने के बजाय प्रभावित किसानों तक जल्द राहत पहुंचानी चाहिए। साथ ही भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को देखते हुए सरल और प्रभावी राहत एवं फसल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने की भी मांग की।

जटिल औपचारिकताओं से योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी
विनय शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से किसान हित में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जटिल नियमों और औपचारिकताओं के कारण कई जरूरतमंद किसान इनका लाभ नहीं उठा पाते। जानकारी के अभाव में भी किसान योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने किसान हित की योजनाओं की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि खेती की बढ़ती लागत और आमदनी के बीच अंतर बढ़ने से किसान आर्थिक दबाव में हैं। सरकार को किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए धरातल पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए
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