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Bilaspur News: घुमारवीं-झंडूता के खैर उत्पादक किसानों ने उठाई कटान परमिट की मांग
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कहा-परमिट जारी न होने से किसानों को उठाना पड़ रहा आर्थिक नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं और झंडूता वन परिक्षेत्र में खैर कटान के परमिट जारी न होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गांव सारटी निवासी किसान एवं समाजसेवी लक्ष्मण सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार और वन विभाग से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
लक्ष्मण सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खैर कटान के लिए 10 वर्ष के अंतराल पर अनुमति देने की नीति रही है। इसके तहत घुमारवीं और झंडूता क्षेत्र में वर्ष 2012-13 के बाद वर्ष 2022-23 में खैर कटान के परमिट मिलने चाहिए थे, लेकिन अभी तक इन क्षेत्रों को खैर कटान के लिए नहीं खोला गया है। इसके चलते किसानों के सैकड़ों बहुमूल्य खैर के पेड़ बीमारी और अन्य कारणों से सूख चुके हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण खैर उत्पादन किसानों के लिए आय का साधन होने के बावजूद प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि जनवरी और फरवरी 2026 में भी इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया गया था और विधानसभा सत्र में भी इसकी चर्चा हुई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और प्रधान सचिव वन से मांग की है कि किसानों के हित में शीघ्र निर्णय लेकर विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं और झंडूता वन परिक्षेत्र में खैर कटान के परमिट जारी न होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गांव सारटी निवासी किसान एवं समाजसेवी लक्ष्मण सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार और वन विभाग से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
लक्ष्मण सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खैर कटान के लिए 10 वर्ष के अंतराल पर अनुमति देने की नीति रही है। इसके तहत घुमारवीं और झंडूता क्षेत्र में वर्ष 2012-13 के बाद वर्ष 2022-23 में खैर कटान के परमिट मिलने चाहिए थे, लेकिन अभी तक इन क्षेत्रों को खैर कटान के लिए नहीं खोला गया है। इसके चलते किसानों के सैकड़ों बहुमूल्य खैर के पेड़ बीमारी और अन्य कारणों से सूख चुके हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण खैर उत्पादन किसानों के लिए आय का साधन होने के बावजूद प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि जनवरी और फरवरी 2026 में भी इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया गया था और विधानसभा सत्र में भी इसकी चर्चा हुई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और प्रधान सचिव वन से मांग की है कि किसानों के हित में शीघ्र निर्णय लेकर विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
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