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Bilaspur News: कोकून उत्पादकों को कपड़ा-धागा बनाने का प्रशिक्षण देगा रेशम विभाग

Thu, 15 May 2025 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 15 May 2025 11:01 PM IST
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Silk department will provide training to cocoon producers to make cloth and thread
खास खबर
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रेशम की खेती से जुड़े किसानों के लिए प्रोजेक्ट शुरू करने की है योजना
इस साल प्रदेश में पिछले साल से 18 मीट्रिक टन ज्यादा है रेशम उत्पादन
ऐरी रेशम की डिमांड सबसे ज्यादा, ओक तसर की चल रहा पालन
रेशम उत्पादन से मुनाफा बढ़ाने की योजना, महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर

सरोज पाठक
बिलासपुर। प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार और विभाग नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। ऐरी, शहतूत और ओक तसर रेशम का उत्पादन प्रदेश में अच्छा हो रहा है। वर्तमान में ओक तसर का पालन चल रहा है। जबकि ऐरी रेशम की मांग सबसे अधिक बताई जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब किसानों को धागा और कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण देने की योजना के प्रस्ताव पर भी विभाग काम कर रहा है, ताकि किसान कोकून बेचने की बजाय खुद धागा, कपड़ा तैयार कर ज्यादा मुनाफा कमा सकें।
रेशम विभाग की योजना है कि महिलाओं को समूहों में बांटकर धागा बनाने का प्रशिक्षण दिया जाए। इसके बाद महिलाएं न केवल धागा तैयार करेंगी, बल्कि इसी धागे से मफलर, स्टॉल और कपड़े भी खुद तैयार कर सकेंगी। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनेंगी। विभाग का मानना है कि कोकून बेचने से किसानों को उतना मुनाफा नहीं मिलता जितना खुद धागा और कपड़ा तैयार करके मिल सकता है। इस बार प्रदेश में कोकून की फसल भी अच्छी हुई है। पिछले वर्ष जहां 142 मीट्रिक टन कोकून का उत्पादन हुआ था, इस वर्ष 160 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को उम्मीद है कि इस साल उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे।
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इनसेट
बिलासपुर के 100 किसानों के लिए भेजा गया 1.59 करोड़ का प्रोजेक्ट
प्रदेश में ऐरी रेशम की खेती का ट्रायल सफल रहा है। विभाग ने तीन बार अपने स्तर पर ट्रायल किया और सफलता के बाद भारत सरकार को 1.59 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भेजा है। यह प्रोजेक्ट बिलासपुर जिले के 100 किसानों के लिए है। उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार से इस योजना को जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद किसान अपने स्तर पर ऐरी रेशम की खेती कर सकेंगे। हालांकि भारत सरकार की प्राथमिकता कसेरू रेशम (कैस्टर आधारित) की खेती पर ज्यादा है, क्योंकि प्रदेश में कैस्टर की अच्छी उपलब्धता है।
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इनसेट
20 से 26 मई तक घुमारवीं में कोकून की खुलेगी बोली
बिलासपुर जिले के लिए 20 से 26 मई तक घुमारवीं में कोकून की खुली बोली लगाई जाएगी। इसमें देशभर से व्यापारी पहुंचेंगे। किसान इन तारीखों में किसी भी दिन अपना कोकून बेच सकते हैं। पिछले साल इस बोली में किसानों को प्रति किलो अधिकतम 1700 रुपये और न्यूनतम 1300 रुपये का दाम मिला था।

कोट
सेरीकल्चर (रेशम पालन) को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार प्राथमिक स्तर पर काम कर रही है। जल्द ही इस सेक्टर से जुड़े किसानों के लिए बेहतर योजनाएं चलाई जाएंगी। जिससे उनकी आर्थिकी और मजबूत होगी। विभाग का प्रयास है कि कोकून उत्पादन से जुड़े किसानों को धागा तैयार करने और कपड़ा बनाने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाए। ताकि वो खुद ही कोकून का उत्पादन करें, खुद ही कपड़ा तैयार कर अपनी आर्थिकी और और सुदृढ़ कर सकें। इस योजना पर काम किया जा रहा है।
बलदेव चौहान, उप निदेशक, रेशम विभाग

संवाद
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