{"_id":"677147d3ddb8e5ba3e00a81b","slug":"shrimad-bhagwat-katha-bilaspur-news-c-92-1-bls1002-129276-2024-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत कथा अमृत से भी प्रभावशाली : पंकज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत कथा अमृत से भी प्रभावशाली : पंकज
विज्ञापन
दोकडू पंचायत में चल रही कथा, 3 जनवरी को होगा समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)| विकासखंड झंडूता की दोकडू पंचायत में श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक आचार्य पंकज अग्निहोत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा अमृत से भी प्रभावशाली होती है।
शौनकादि ऋषियों को श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए सूत जी ने कहा कि जब सुखदेव जी राजा परीक्षित को कथा सुना रहे थे, तब देवता अमृत कलश लेकर आए और कहा कि आप अमृत के बदले कथामृत हमें दें। तब सुखदेव जी ने कहा कि कहां पारस पत्थर और कहां शीशे का टुकड़ा। कहां सुधा और कहां श्रीमद् भागवत कथा। उन्होंने देवताओं को इसके लायक न समझते हुए उन्हें कथा नहीं सुनाई। सूत जी ने तब कहा कि स्वर्ग में सब सुख का साधन है पर भगवान की कथा नहीं होती। यह कथा देवताओं को दुर्लभ है और मनुष्य को सुलभ है। अतः हमें कथा श्रवण करके लाभ लेना चाहिए।
आचार्य ने कहा कि नारद भ्रमण के लिए धरती पर आए और सभी तीर्थों में गए। उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिली, तो वृंदावन में नवयुवती के रूप में भक्ति मिली, पर उसके पुत्र ज्ञान और वैराग्य बुद्धि अचेत अवस्था में मिले। उन्होंने जगाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। आकाशवाणी हुई कि सत्कर्म करो। तब विशाल क्षेत्र में सनकादि ऋषियों ने बताया कि श्रीमद् भागवत श्रवण ही सबसे बड़ा सत्कर्म है। भागवत कथा का समापन 3 जनवरी को हवन यज्ञ और भंडारे के साथ होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)| विकासखंड झंडूता की दोकडू पंचायत में श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक आचार्य पंकज अग्निहोत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा अमृत से भी प्रभावशाली होती है।
शौनकादि ऋषियों को श्रीमद्भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए सूत जी ने कहा कि जब सुखदेव जी राजा परीक्षित को कथा सुना रहे थे, तब देवता अमृत कलश लेकर आए और कहा कि आप अमृत के बदले कथामृत हमें दें। तब सुखदेव जी ने कहा कि कहां पारस पत्थर और कहां शीशे का टुकड़ा। कहां सुधा और कहां श्रीमद् भागवत कथा। उन्होंने देवताओं को इसके लायक न समझते हुए उन्हें कथा नहीं सुनाई। सूत जी ने तब कहा कि स्वर्ग में सब सुख का साधन है पर भगवान की कथा नहीं होती। यह कथा देवताओं को दुर्लभ है और मनुष्य को सुलभ है। अतः हमें कथा श्रवण करके लाभ लेना चाहिए।
विज्ञापन
आचार्य ने कहा कि नारद भ्रमण के लिए धरती पर आए और सभी तीर्थों में गए। उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिली, तो वृंदावन में नवयुवती के रूप में भक्ति मिली, पर उसके पुत्र ज्ञान और वैराग्य बुद्धि अचेत अवस्था में मिले। उन्होंने जगाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। आकाशवाणी हुई कि सत्कर्म करो। तब विशाल क्षेत्र में सनकादि ऋषियों ने बताया कि श्रीमद् भागवत श्रवण ही सबसे बड़ा सत्कर्म है। भागवत कथा का समापन 3 जनवरी को हवन यज्ञ और भंडारे के साथ होगा।
विज्ञापन