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श्री कृष्ण ने आम जन को भय मुक्त करने के लिए कष्ट झेले : हंसराज

Sat, 02 Nov 2024 11:43 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 02 Nov 2024 11:43 PM IST
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Shri Krishna endured hardships to free the common people from fear: Hansraj
श्री नयना देवी जी के झिडिय़ां गांव में आायोजित श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु। संवाद
-अपने बच्चों को यश देती है वह यशोदा, जो आनंद देते हैं वे नंद
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श्रीमद्भागवत कथा में किया श्री कृष्ण लीला का वर्णन

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री नयना देवी जी के साथ लगते झिड़ियां कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए पंडित हंसराज शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विवेचन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने आम जन को भयमुक्त करने के लिए तमाम दुखों, कष्टों को अपने ऊपर झेला है। उन्होंने कहा कि जो अपने बच्चों को यश देती है वह यशोदा है और जो आनंद देते हैं वे नंद यानि नंद बाबा हैं। जब कंस को यह पता चल गया कि उसकी मृत्यु का कारण देवकी के गर्भ से पैदा हो चुका है, सुरक्षित निकल भी गया है तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ। बाल कृष्ण की हत्या करने की योजनाएं तैयार करने लगा। इतने में उसने अपनी सहोदरा पूतना को भेजा। पूतना अपने स्तनों पर विष लगाकर योजनाबद्ध तरीके से नंद बाबा के घर तक पहुंच गई। जहां पर उसने माता यशोदा से कान्हा से मिलने की इच्छा व्यक्त की। सरल स्वभाव की यशोदा ने भी ज्यादा प्रश्न न करते हुए कान्हा को उसे सौंप दिया। भगवान श्रीकृष्ण को ज्ञात था कि यह स्त्री कौन है। बताया कि जैसे ही पूतना ने कान्हा को गोद में लिया तो उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की आंखें बंद करने के पीछे रहस्य यह था कि यदि उनके नयन पूतना के नयनों से मिलते तो कही प्रेम न हो जाता, जिससे उसका वध करने में यही प्रेम आड़े आता। धोखे से पूतना ने कान्हा को दूध पिलाना शुरू किया। कान्हा ने पहले दूध पिया फिर विष पान किया। विषपान करने से पूर्व कान्हा ने नीलकंठ महादेव को स्मरण किया। विष पान के बाद जब कान्हा उसके प्राणों का पान करने लगे तो भयंकर नाद करती हुई पूतना अपने वास्तविक रूप में आ गई। गांव में कोलाहल मच गया। धीरे-धीरे कान्हा ने पूतना का वध कर दिया। वहीं पंडित हंस राज शर्मा ने श्रद्धालुओं को यह भी समझाया कि कोई अज्ञात व्यक्ति मिले तो एकदम से उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए। कई बार यह घातक साबित होता है। कथा समापन पर भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। बाद में प्रसाद वितरण हुआ।
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