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Bilaspur News: श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में शिव महापुराण कथा शुरू
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कथावाचक पंडित पुनीत शर्मा
कथावाचक पंडित पुनीत शर्मा ने पंचाक्षर का बताया महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मंदिर न्यास अधिकारी और एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
कथावाचक पंडित पुनीत शर्मा ने पंचाक्षर मत्र ऊं नम: शिवाय का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वेदों और पुराणों के अनुसार शिव अर्थात सृष्टि के सृजनकर्ता को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ ऊं नम: शिवाय का जप ही काफी है। भोलेनाथ इस मंत्र से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और इस मंत्र के जप से आपके सभी दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। श्रावण माह में स्वयं भगवान शिव माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित पृथ्वी पर विराजते हैं। श्रावण का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस मास में वे अपने आराध्य भोलेनाथ की विधि विधान से पूजाकर आशीर्वाद लेते हैं। शिवपूजा का सर्वमान्य पंचाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय जो प्रारंभ में ऊं संयोग से षडाक्षर हो जाता है, भगवान शिव को शीघ्र ही प्रसन्न कर देता है। हृदय में ऊं नम: शिवाय का मंत्र समाहित होने पर संपूर्ण शास्त्र ज्ञान और शुभ कार्यों का ज्ञान स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। पंडित बाबू राम शर्मा ने बताया कि 27 फरवरी तक मंदिर में प्रतिदिन 2 से 5 बजे तक कथा का आयोजन होगा। कथा समापन पर प्रसाद वितरित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मंदिर न्यास अधिकारी और एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
कथावाचक पंडित पुनीत शर्मा ने पंचाक्षर मत्र ऊं नम: शिवाय का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वेदों और पुराणों के अनुसार शिव अर्थात सृष्टि के सृजनकर्ता को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ ऊं नम: शिवाय का जप ही काफी है। भोलेनाथ इस मंत्र से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और इस मंत्र के जप से आपके सभी दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। श्रावण माह में स्वयं भगवान शिव माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित पृथ्वी पर विराजते हैं। श्रावण का महीना शिव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस मास में वे अपने आराध्य भोलेनाथ की विधि विधान से पूजाकर आशीर्वाद लेते हैं। शिवपूजा का सर्वमान्य पंचाक्षर मंत्र ऊं नम: शिवाय जो प्रारंभ में ऊं संयोग से षडाक्षर हो जाता है, भगवान शिव को शीघ्र ही प्रसन्न कर देता है। हृदय में ऊं नम: शिवाय का मंत्र समाहित होने पर संपूर्ण शास्त्र ज्ञान और शुभ कार्यों का ज्ञान स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। पंडित बाबू राम शर्मा ने बताया कि 27 फरवरी तक मंदिर में प्रतिदिन 2 से 5 बजे तक कथा का आयोजन होगा। कथा समापन पर प्रसाद वितरित किया गया।
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