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Bilaspur News: सत्संग में पहुंचना भी प्रभु की कृपा का संकेत
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बाबा विश्वकर्मा मंदिर में श्री राम कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु। स्रोत: समिति
बाबा विश्वकर्मा मंदिर में श्री राम कथा के दूसरे दिन आचार्य नीरज शर्मा ने बताया सत्संग का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के बाबा विश्वकर्मा मंदिर में 28वें श्री गणेश उत्सव के तहत चल रही श्रीराम कथा में मंगलवार को श्रद्धालुओं को सत्संग के महत्व का संदेश मिला। कथा व्यास आचार्य नीरज शर्मा ने कहा कि सत्संग में पहुंचना हर किसी के भाग्य में नहीं होता। इसके लिए भी भगवान श्रीराम की कृपा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही विधानसभा या लोकसभा में पहुंचते हैं, उसी तरह प्रभु की कृपा जिन पर होती है, वही सत्संग तक पहुंच पाते हैं। आचार्य ने कहा कि मनुष्य का जीवन जिस संगति में बीतता है, उसका प्रभाव उसके विचारों और कर्मों पर भी पड़ता है। सत्संग व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने भगवान शिव और मां पार्वती के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि मां पार्वती ने भगवान शिव से सुख और दुख की परिभाषा पूछी थी। भगवान शिव ने बताया कि सत्संग में होना ही सुख है। जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, वह सुखी रहता है, जबकि सत्संग से दूर होने पर जीवन में दुख बढ़ने लगता है। कथा के दौरान आचार्य नीरज शर्मा ने भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की महिमा का भी वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और हनुमान जी के भजनों का श्रवण किया। मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के बाबा विश्वकर्मा मंदिर में 28वें श्री गणेश उत्सव के तहत चल रही श्रीराम कथा में मंगलवार को श्रद्धालुओं को सत्संग के महत्व का संदेश मिला। कथा व्यास आचार्य नीरज शर्मा ने कहा कि सत्संग में पहुंचना हर किसी के भाग्य में नहीं होता। इसके लिए भी भगवान श्रीराम की कृपा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही विधानसभा या लोकसभा में पहुंचते हैं, उसी तरह प्रभु की कृपा जिन पर होती है, वही सत्संग तक पहुंच पाते हैं। आचार्य ने कहा कि मनुष्य का जीवन जिस संगति में बीतता है, उसका प्रभाव उसके विचारों और कर्मों पर भी पड़ता है। सत्संग व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने भगवान शिव और मां पार्वती के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि मां पार्वती ने भगवान शिव से सुख और दुख की परिभाषा पूछी थी। भगवान शिव ने बताया कि सत्संग में होना ही सुख है। जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, वह सुखी रहता है, जबकि सत्संग से दूर होने पर जीवन में दुख बढ़ने लगता है। कथा के दौरान आचार्य नीरज शर्मा ने भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की महिमा का भी वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम और हनुमान जी के भजनों का श्रवण किया। मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा।