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Bilaspur News: निजी जमीन पर सड़क बनाने के मामले में सरकार को झटका
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गेहड़वीं-थुराण सड़क मामले में जिला अदालत ने सरकार और पीडब्ल्यूडी की अपील खारिज की
सिविल जज झंडूता के फैसले को रखा बरकरार,तीन माह में मुआवजा देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गेहड़वीं से थुराण तक बनी सड़क के लिए इस्तेमाल की गई निजी जमीन के मुआवजे के मामले में जिला अदालत बिलासपुर ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग की अपील खारिज कर दी है। जिला जज की अदालत ने सिविल जज झंडूता के 27 मई 2024 के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने निजी जमीन के लिए मुआवजे के साथ सोलाटियम, ब्याज और अन्य वैधानिक लाभ देने के निर्देश दिए हैं। मामला झंडूता तहसील के जमोई गांव का है। माया देवी और कौशल्या देवी ने सरकार और पीडब्ल्यूडी के खिलाफ वाद दायर किया था। उनका कहना था कि वे खसरा नंबर 19 में दर्ज करीब पांच बीघा तीन बिस्वा भूमि की सह-स्वामी हैं। विभाग ने उनकी जमीन के हिस्से से गेहड़वीं बाजार से बड़ोल देवी थुराण तक सड़क बनाई, लेकिन जमीन का विधिवत अधिग्रहण नहीं किया और मुआवजा भी नहीं दिया। सरकार ने दावा किया कि सड़क का निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था और स्थानीय लोगों ने जमीन स्वेच्छा से बिना मुआवजे के दी थी। अदालत ने कहा कि विभाग जमीन अधिग्रहण या उसके वैध हस्तांतरण का कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका। केवल मौखिक सहमति के आधार पर निजी संपत्ति का इस्तेमाल कानूनी अधिकार नहीं देता। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 300-ए का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति से किसी व्यक्ति को केवल कानून के अधिकार के तहत ही वंचित किया जा सकता है। निचली अदालत के डीम्ड एक्विजिशन के आधार पर मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखते हुए तीन माह में भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वादियों को 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देना होगा। जिला अदालत ने 27 अगस्त 2026 को सरकार की अपील खारिज कर दी।
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सिविल जज झंडूता के फैसले को रखा बरकरार,तीन माह में मुआवजा देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गेहड़वीं से थुराण तक बनी सड़क के लिए इस्तेमाल की गई निजी जमीन के मुआवजे के मामले में जिला अदालत बिलासपुर ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग की अपील खारिज कर दी है। जिला जज की अदालत ने सिविल जज झंडूता के 27 मई 2024 के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने निजी जमीन के लिए मुआवजे के साथ सोलाटियम, ब्याज और अन्य वैधानिक लाभ देने के निर्देश दिए हैं। मामला झंडूता तहसील के जमोई गांव का है। माया देवी और कौशल्या देवी ने सरकार और पीडब्ल्यूडी के खिलाफ वाद दायर किया था। उनका कहना था कि वे खसरा नंबर 19 में दर्ज करीब पांच बीघा तीन बिस्वा भूमि की सह-स्वामी हैं। विभाग ने उनकी जमीन के हिस्से से गेहड़वीं बाजार से बड़ोल देवी थुराण तक सड़क बनाई, लेकिन जमीन का विधिवत अधिग्रहण नहीं किया और मुआवजा भी नहीं दिया। सरकार ने दावा किया कि सड़क का निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था और स्थानीय लोगों ने जमीन स्वेच्छा से बिना मुआवजे के दी थी। अदालत ने कहा कि विभाग जमीन अधिग्रहण या उसके वैध हस्तांतरण का कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका। केवल मौखिक सहमति के आधार पर निजी संपत्ति का इस्तेमाल कानूनी अधिकार नहीं देता। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 300-ए का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति से किसी व्यक्ति को केवल कानून के अधिकार के तहत ही वंचित किया जा सकता है। निचली अदालत के डीम्ड एक्विजिशन के आधार पर मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखते हुए तीन माह में भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वादियों को 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देना होगा। जिला अदालत ने 27 अगस्त 2026 को सरकार की अपील खारिज कर दी।