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Bilaspur News: जुलाई से चिट्टे के खिलाफ विशेष अभियान चलाएगी संस्कार संस्था
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- पंचायतों की आम सभाओं में चिट्टा पैडलरों के खिलाफ पारित कराएगी प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। संस्कार संस्था की ओर से चिट्टे के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत शनिवार को पडयालग में आरआर मेमोरियल स्कूल में विद्यार्थियों को जागरूक किया। संस्था के संस्थापक महेंद्र धर्माणी ने सामाजिक संस्थाओं, महिला मंडल सदस्य, चुनिंदा प्रतिनिधियों को चिट्टे के विरुद्ध कार्य करने का आह्वान किया।
धर्माणी ने कहा कि संस्कार संस्था घुमारवीं जुलाई से घुमारवीं उपमंडल की पंचायतों में आम सभाओं से चिट्टा पैडलरों के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए प्रस्ताव पारित कराएगी। संस्कार संस्था दूसरी सामाजिक संस्थाओं और लोगों के साथ मिलकर अभियान को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य करेगी, ताकि इस जहर को खत्म किया जा सके। आजकल प्रचलित चिट्टे का नशा एक बार लेने से ही दिमाग के सैल में रासायनिक तबदीली हो जाती है। इससे इंसान इसका आदी बन जाता है। उन्होंने बच्चों, अध्यापकों को सचेत किया कि अगर कहीं जली हुई पन्नी, सीरिंज, टीके, सिगरेट, लाइटर, सफेद रंग का पाउडर मिले तो यह नशा करने के संकेत हैं। आज के समय में चिट्टे का नशा युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। हर रोज नए नए मामले चिट्टे के सामने आ रहे हैं। इस चिट्टे जैसे नशे से युवा पीढ़ी को बचाने के तहत संस्कार संस्था द्वारा घुमारवी अंगेस्ट चिट्टा अभियान शुरू किया गया है। कहा कि अध्यापक और अभिभावकों का बच्चों के साथ मित्रता का भाव रखना जरूरी है। बच्चों के स्कूल आने-जाने के साथ अन्य गतिविधियों के बारे में अभिभावकों को पता होना जरूरी है। एक बार जो चिट्टे का सेवन कर लेता है, उसे चिट्टे के चंगुल से बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। पंजाब सहित अन्य राज्यों से चिट्टा हिमाचल पहुंच रहा है, लेकिन यहां के कुछ लोग पैसे कमाने के चक्कर में गांव-गांव तक चिट्टे की खेप पहुंचा रहे हैं। जब तक आमजन जागरूक नहीं होगा, इस चिट्टे के जहर को रोका नहीं जा सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। संस्कार संस्था की ओर से चिट्टे के विरुद्ध चलाए गए अभियान के तहत शनिवार को पडयालग में आरआर मेमोरियल स्कूल में विद्यार्थियों को जागरूक किया। संस्था के संस्थापक महेंद्र धर्माणी ने सामाजिक संस्थाओं, महिला मंडल सदस्य, चुनिंदा प्रतिनिधियों को चिट्टे के विरुद्ध कार्य करने का आह्वान किया।
धर्माणी ने कहा कि संस्कार संस्था घुमारवीं जुलाई से घुमारवीं उपमंडल की पंचायतों में आम सभाओं से चिट्टा पैडलरों के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए प्रस्ताव पारित कराएगी। संस्कार संस्था दूसरी सामाजिक संस्थाओं और लोगों के साथ मिलकर अभियान को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य करेगी, ताकि इस जहर को खत्म किया जा सके। आजकल प्रचलित चिट्टे का नशा एक बार लेने से ही दिमाग के सैल में रासायनिक तबदीली हो जाती है। इससे इंसान इसका आदी बन जाता है। उन्होंने बच्चों, अध्यापकों को सचेत किया कि अगर कहीं जली हुई पन्नी, सीरिंज, टीके, सिगरेट, लाइटर, सफेद रंग का पाउडर मिले तो यह नशा करने के संकेत हैं। आज के समय में चिट्टे का नशा युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है। हर रोज नए नए मामले चिट्टे के सामने आ रहे हैं। इस चिट्टे जैसे नशे से युवा पीढ़ी को बचाने के तहत संस्कार संस्था द्वारा घुमारवी अंगेस्ट चिट्टा अभियान शुरू किया गया है। कहा कि अध्यापक और अभिभावकों का बच्चों के साथ मित्रता का भाव रखना जरूरी है। बच्चों के स्कूल आने-जाने के साथ अन्य गतिविधियों के बारे में अभिभावकों को पता होना जरूरी है। एक बार जो चिट्टे का सेवन कर लेता है, उसे चिट्टे के चंगुल से बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। पंजाब सहित अन्य राज्यों से चिट्टा हिमाचल पहुंच रहा है, लेकिन यहां के कुछ लोग पैसे कमाने के चक्कर में गांव-गांव तक चिट्टे की खेप पहुंचा रहे हैं। जब तक आमजन जागरूक नहीं होगा, इस चिट्टे के जहर को रोका नहीं जा सकता है।
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