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सेल्जमैन के बेटे ने पास की नीट की परीक्षा
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नीट की परीक्षा पास करने वाले निलाक्ष रतवान अपने माता पिता के साथ। संवाद
- फोटो : BILASPUR
घुमारवीं (बिलासपुर)। कहते हैं जज्बा, लगन, हिम्मत और लक्ष्य सामने हो तो कामयाबी खुद कदम चूम लेती है। इसे कृतार्थ कर दिखाया है कि घुमारवीं उपमंडल के साथ लगती ग्राम पंचायत लुहारवीं के गांव मतवाना के निलाक्ष रतवान ने।
निलाक्ष रतवान ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में 660 अंक प्राप्त करने के साथ बिलासपुर जिले में पहला स्थान हासिल किया है। बेहद गरीब और आईआरडीपी परिवार से संबंधित निलाक्ष रतवान शुरू से पढ़ाई में बहुत तेज और कुशाग्र बुद्धि के छात्र रहे हैं। इनके पिता मनोज कुमार कपड़े की दुकान पर सेल्समैन हैं। माता वीना कुमारी गृहिणी हैं।
विपरीत परिस्थितियों में माता-पिता ने भी बच्चे के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। वीना कुमारी ने भी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए घर पर एक गाय रखी हैं और बाजार में दूध बेचती हैं।
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होनहार बेटे ने तभी सपने को साकार करने के लिए पहला कदम बढ़ा दिया था। जब बारहवीं की बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश भर में सातवां स्थान हासिल किया था। निलाक्ष का कहना है कि सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए मेहनत करनी चाहिए तो मंजिल खुद कदम चूमती है । पिता मनोज कुमार कहना है कि बच्चे ही मां-बाप का संसार होते हैं। बेटा पहले से पढ़ाई में अव्वल था।
उसके सपने को साकार करने के लिए आर्थिकी रोड़ा बन रही थी, लेकिन भगवान पर भरोसा रखा और सब ठीक चलता रहा। बेटे ने इस मुकाम को पाने के लिए मात्र छह महीने कोचिंग ली है। निलाक्ष का छोटा भाई है वह भी डॉक्टर ही बनना चाहता है और बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। मनोज के घर पर रिश्तेदारों और लोगों का बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है।
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निलाक्ष रतवान ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में 660 अंक प्राप्त करने के साथ बिलासपुर जिले में पहला स्थान हासिल किया है। बेहद गरीब और आईआरडीपी परिवार से संबंधित निलाक्ष रतवान शुरू से पढ़ाई में बहुत तेज और कुशाग्र बुद्धि के छात्र रहे हैं। इनके पिता मनोज कुमार कपड़े की दुकान पर सेल्समैन हैं। माता वीना कुमारी गृहिणी हैं।
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विपरीत परिस्थितियों में माता-पिता ने भी बच्चे के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। वीना कुमारी ने भी आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए घर पर एक गाय रखी हैं और बाजार में दूध बेचती हैं।
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होनहार बेटे ने तभी सपने को साकार करने के लिए पहला कदम बढ़ा दिया था। जब बारहवीं की बोर्ड की परीक्षा में प्रदेश भर में सातवां स्थान हासिल किया था। निलाक्ष का कहना है कि सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए मेहनत करनी चाहिए तो मंजिल खुद कदम चूमती है । पिता मनोज कुमार कहना है कि बच्चे ही मां-बाप का संसार होते हैं। बेटा पहले से पढ़ाई में अव्वल था।
उसके सपने को साकार करने के लिए आर्थिकी रोड़ा बन रही थी, लेकिन भगवान पर भरोसा रखा और सब ठीक चलता रहा। बेटे ने इस मुकाम को पाने के लिए मात्र छह महीने कोचिंग ली है। निलाक्ष का छोटा भाई है वह भी डॉक्टर ही बनना चाहता है और बारहवीं कक्षा में पढ़ता है। मनोज के घर पर रिश्तेदारों और लोगों का बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है।