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Bilaspur News: सड़कों पर घूम रहे गोवंश से बढ़ा हादसों का खतरा, प्रशासन ने दस पशु गोशाला भेजे
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बिलासपुर में लावारिस पशु को नियंत्रित करते कर्मचारी। स्रोत: डीपीआरओ
जिला प्रशासन ने छेड़ा अभियान, छह गोवंश रानी कोटला और चार बरमाणा गोशाला भेजे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर की सड़कों पर जगह-जगह घूम रहे गोवंश से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। सड़क पर अचानक पशु आने से हादसे का खतरा बना रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान शुरू कर दिया है। नगर परिषद और पशुपालन विभाग के सहयोग से चलाए जा रहे अभियान में अब तक शहर से दस गोवंश पकड़े जा चुके हैं। इनमें छह को रानी कोटला और चार को बरमाणा स्थित हरिओम गोशाला भेजा गया है। शहर की व्यस्त सड़कों पर गोवंश के झुंड बैठे रहने से वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। कई जगह पशु सड़क के बीच में ही बैठे रहते हैं। दिन में चालक किसी तरह इन्हें बचाकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु दिखाई नहीं देने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है। पशुओं को बचाने के दौरान वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। एसडीएम बिलासपुर राज कुमार ने बताया कि शहर में लावारिस पशुओं की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग और नगर परिषद के सहयोग से अभियान शुरू किया गया है। अब तक दस पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा चुका है। अभियान आगे भी जारी रहेगा।उन्होंने बताया कि शहर के साथ चांदपुर और कंदरौर क्षेत्र में भी अभियान चलाया जाएगा। यहां सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने की व्यवस्था की जाएगी। पकड़े जाने वाले कुछ पशुओं को नालागढ़ स्थित हांडाकुंडी गोशाला भेजने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा खंड विकास अधिकारी कार्यालय के सहयोग से हाईवे से सटी पंचायतों में अभियान चलाया जाएगा।
हाईवे से सटी पंचायतों में भी अभियान
प्रशासन अब अभियान को केवल शहर तक सीमित नहीं रखेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी उन पंचायतों में भी गोवंश पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा, जहां सड़कों पर लावारिस पशुओं की संख्या अधिक है। हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के कारण इन क्षेत्रों में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
पशुपालकों से खुले में पशु न छोड़ने की अपील
प्रशासन ने पशुपालकों से अपने पशुओं को खुले में न छोड़ने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सड़कों पर पशुओं के घूमने से यातायात प्रभावित होने के साथ हादसों का खतरा बना रहता है। अभियान से तत्काल राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब पशुपालक अपने पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ना बंद करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर की सड़कों पर जगह-जगह घूम रहे गोवंश से वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। सड़क पर अचानक पशु आने से हादसे का खतरा बना रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान शुरू कर दिया है। नगर परिषद और पशुपालन विभाग के सहयोग से चलाए जा रहे अभियान में अब तक शहर से दस गोवंश पकड़े जा चुके हैं। इनमें छह को रानी कोटला और चार को बरमाणा स्थित हरिओम गोशाला भेजा गया है। शहर की व्यस्त सड़कों पर गोवंश के झुंड बैठे रहने से वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। कई जगह पशु सड़क के बीच में ही बैठे रहते हैं। दिन में चालक किसी तरह इन्हें बचाकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। अंधेरे में सड़क पर बैठे पशु दिखाई नहीं देने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है। पशुओं को बचाने के दौरान वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। एसडीएम बिलासपुर राज कुमार ने बताया कि शहर में लावारिस पशुओं की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग और नगर परिषद के सहयोग से अभियान शुरू किया गया है। अब तक दस पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जा चुका है। अभियान आगे भी जारी रहेगा।उन्होंने बताया कि शहर के साथ चांदपुर और कंदरौर क्षेत्र में भी अभियान चलाया जाएगा। यहां सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने की व्यवस्था की जाएगी। पकड़े जाने वाले कुछ पशुओं को नालागढ़ स्थित हांडाकुंडी गोशाला भेजने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा खंड विकास अधिकारी कार्यालय के सहयोग से हाईवे से सटी पंचायतों में अभियान चलाया जाएगा।
हाईवे से सटी पंचायतों में भी अभियान
प्रशासन अब अभियान को केवल शहर तक सीमित नहीं रखेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी उन पंचायतों में भी गोवंश पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा, जहां सड़कों पर लावारिस पशुओं की संख्या अधिक है। हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के कारण इन क्षेत्रों में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
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पशुपालकों से खुले में पशु न छोड़ने की अपील
प्रशासन ने पशुपालकों से अपने पशुओं को खुले में न छोड़ने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सड़कों पर पशुओं के घूमने से यातायात प्रभावित होने के साथ हादसों का खतरा बना रहता है। अभियान से तत्काल राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब पशुपालक अपने पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ना बंद करें।
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