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Bilaspur News: नशा तस्करी के मामले में जब्त वाहन लौटाने के आदेश
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एक लाख के सुपुर्दारी बांड और इतनी ही राशि के जमानती पर वाहन होगा रिलीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वारघाट थाना में नशा तस्करी से जुड़े मामले में पुलिस की ओर से जब्त किए गए वाहन को विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने आवेदक को लौटाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने वाहन को एक लाख रुपये के सुपुर्दारी बांड और इतनी ही राशि के एक जमानती के आधार पर रिलीज करने के निर्देश दिए।
मामला 16 जुलाई 2026 को स्वारघाट थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच के दौरान वाहन कब्जे में लिया था। वाहन की रिहाई के लिए आवेदक ने अदालत में आवेदन किया। सुनवाई के दौरान उसकी ओर से अधिवक्ता अभिषेक और सरकार की ओर से लोक अभियोजक एनएस चौहान पेश हुए। वाहन के स्वामित्व से संबंधित शपथपत्र भी अदालत में दाखिल किया गया।
आवेदक ने बताया कि वह मामले में न तो शामिल था और न ही आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भी वाहन रिलीज करने पर आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने पाया कि वाहन से संबंधित जांच पूरी हो चुकी है और अब इसे पुलिस के पास रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। इसलिए दस्तावेज और चाबियों समेत वाहन सौंपने के आदेश दिए गए।
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अदालत ने कहा कि पूर्व अनुमति के बिना वाहन बेचा या निस्तारित नहीं किया जाएगा। इसके स्वरूप में बदलाव भी नहीं किया जा सकेगा और आदेश पर वाहन पेश करना होगा। भविष्य में वाहन इसी तरह के अपराध में इस्तेमाल पाया गया तो एनडीपीएस एक्ट की धारा 60 के तहत कार्रवाई हो सकेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वारघाट थाना में नशा तस्करी से जुड़े मामले में पुलिस की ओर से जब्त किए गए वाहन को विशेष न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने आवेदक को लौटाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने वाहन को एक लाख रुपये के सुपुर्दारी बांड और इतनी ही राशि के एक जमानती के आधार पर रिलीज करने के निर्देश दिए।
मामला 16 जुलाई 2026 को स्वारघाट थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच के दौरान वाहन कब्जे में लिया था। वाहन की रिहाई के लिए आवेदक ने अदालत में आवेदन किया। सुनवाई के दौरान उसकी ओर से अधिवक्ता अभिषेक और सरकार की ओर से लोक अभियोजक एनएस चौहान पेश हुए। वाहन के स्वामित्व से संबंधित शपथपत्र भी अदालत में दाखिल किया गया।
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आवेदक ने बताया कि वह मामले में न तो शामिल था और न ही आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भी वाहन रिलीज करने पर आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने पाया कि वाहन से संबंधित जांच पूरी हो चुकी है और अब इसे पुलिस के पास रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। इसलिए दस्तावेज और चाबियों समेत वाहन सौंपने के आदेश दिए गए।
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अदालत ने कहा कि पूर्व अनुमति के बिना वाहन बेचा या निस्तारित नहीं किया जाएगा। इसके स्वरूप में बदलाव भी नहीं किया जा सकेगा और आदेश पर वाहन पेश करना होगा। भविष्य में वाहन इसी तरह के अपराध में इस्तेमाल पाया गया तो एनडीपीएस एक्ट की धारा 60 के तहत कार्रवाई हो सकेगी।