{"_id":"60e099d18ebc3e297d420b88","slug":"opposition-to-e-tender-system-of-fish-production-in-govind-sagar-bilaspur-news-sml375725218","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोविंद सागर में मछली उत्पादन की ई-टेंडर प्रणाली का मत्स्य सभाओं ने जताया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोविंद सागर में मछली उत्पादन की ई-टेंडर प्रणाली का मत्स्य सभाओं ने जताया विरोध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वारघाट (बिलासपुर)। जिला बिलासपुर की गोविंद सागर झील में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पहली बार ई-टेंडर प्रणाली शुरू की है। लेकिन यह प्रणाली मत्स्य सहकारी सभाओं के गले नहीं उतर रही है। मत्स्य सहकारी सभाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे स्थानीय मछुआरे बेरोजगार हो जाएंगे और रोजी-रोटी का संकट हो जाएगा। इस समस्या के संबंध में गोविंदसागर झील की मत्स्य सहकारी सभाओं के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिले और ई-टेंडर प्रणाली को लागू न करने की मांग की।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने इस साल फरवरी माह में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में ई-टेंडर प्रणाली को मंजूरी दी है। प्रतिनिधिमंडल में मत्स्य सहकारी सभा ज्योर के प्रधान बुद्धि राम, मत्स्य सहकारी सभा दौलाधार के प्रधान चरणदास, मत्स्य सहकारी सभा जकातखाना के प्रधान शेर सिंह, मत्स्य सहकारी सभा बलगाड़ के प्रधान बाबू राम, मत्स्य सहकारी सभा मातला के प्रधान शमशेर सिंह, मत्स्य सहकारी सभा जबलु के प्रधान सरवन कुमार शामिल रहे। उपरोक्त सहकारी सभाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि मत्स्यावरण केंद्र जकातखाना में आठ सभाएं पंजीकृत हैं। इनमें हजारों मछुआरे मछली पकड़कर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।
इनका कहना है कि ई-टेंडर प्रणाली से अब गोविंद सागर झील का टेंडर पोलर जेनेटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दे दिया है। अब यह कंपनी सात-आठ साल तक झील में खुद मछली का बीज डालेगी और देखभाल करेगी। मत्स्य सभाओं और मछुआरों को डर है कि कंपनी गोविंद सागर झील में मछली पकड़ने के लिए अपने मछुआरों को भी ला सकती है। इससे सैकड़ों मछुआरों के परिवारों की रोजी-रोटी छीन जाएगी। मत्स्य सभाओं का कहना है कि ई-टेंडर प्रणाली प्रदेश की किसी भी झील में नहीं है। पौंग डैम, चमेरा, कोलडैम इनमें ई टेंडर प्रणाली लागू नहीं है तो गोविंद सागर झील के लिए ऐसा क्यों किया जा रहा है। मत्स्य सहकारी सभाओं ने सरकार से ई टेंडर प्रणाली को खत्म करने और पूर्व की प्रक्रिया को अपनाने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि प्रदेश सरकार ने इस साल फरवरी माह में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में ई-टेंडर प्रणाली को मंजूरी दी है। प्रतिनिधिमंडल में मत्स्य सहकारी सभा ज्योर के प्रधान बुद्धि राम, मत्स्य सहकारी सभा दौलाधार के प्रधान चरणदास, मत्स्य सहकारी सभा जकातखाना के प्रधान शेर सिंह, मत्स्य सहकारी सभा बलगाड़ के प्रधान बाबू राम, मत्स्य सहकारी सभा मातला के प्रधान शमशेर सिंह, मत्स्य सहकारी सभा जबलु के प्रधान सरवन कुमार शामिल रहे। उपरोक्त सहकारी सभाओं के प्रतिनिधियों का कहना है कि मत्स्यावरण केंद्र जकातखाना में आठ सभाएं पंजीकृत हैं। इनमें हजारों मछुआरे मछली पकड़कर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं।
विज्ञापन
इनका कहना है कि ई-टेंडर प्रणाली से अब गोविंद सागर झील का टेंडर पोलर जेनेटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दे दिया है। अब यह कंपनी सात-आठ साल तक झील में खुद मछली का बीज डालेगी और देखभाल करेगी। मत्स्य सभाओं और मछुआरों को डर है कि कंपनी गोविंद सागर झील में मछली पकड़ने के लिए अपने मछुआरों को भी ला सकती है। इससे सैकड़ों मछुआरों के परिवारों की रोजी-रोटी छीन जाएगी। मत्स्य सभाओं का कहना है कि ई-टेंडर प्रणाली प्रदेश की किसी भी झील में नहीं है। पौंग डैम, चमेरा, कोलडैम इनमें ई टेंडर प्रणाली लागू नहीं है तो गोविंद सागर झील के लिए ऐसा क्यों किया जा रहा है। मत्स्य सहकारी सभाओं ने सरकार से ई टेंडर प्रणाली को खत्म करने और पूर्व की प्रक्रिया को अपनाने की मांग की है।
विज्ञापन