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दो घंटे में देश-दुनिया में छा गया हिमाचली रांझा
अमर उजाला बिलासपुर
Updated Fri, 05 Aug 2016 10:42 PM IST
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घोड़ी-धबीरी पंचायत के गांव धबीरी में शुक्रवार को साहिब सिंह सोनी की ओर से पाले गए भैंसे की बोली करीब दो घंटे तक चली। रोजाना सेब और दस लीटर दूध पीने वाला हिमाचली रांझा मात्र दो घंटे में ही देश और दुनिया में छा गया। सोशल मीडिया में भी इस भैंसे ने खूब धूम मचाई। हालांकि भैंसे की बोली लगने के बावजूद इसे बेचा नहीं गया, लेकिन फिर भी हिमाचली रांझे ने दुनिया भर में अपनी पैठ बना ली है। हर कोई इस भैंसे को देखने के लिए बेताब दिखा। आसपास के क्षेत्रों से लोगों की खूब भीड़ उमड़ी। बोली में हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से भी लोगों ने काफी दिलचस्पी दिखाई। बोली के लिए 50 लाख रुपये राशि निर्धारित की गई थी। बोली करीब दोपहर डेढ़ बजे 52 लाख रुपये से शुरू हुई तथा साढ़े तीन बजे तक सिलसिला जारी रहा। आखिरी बोली 1.37 करोड़ तक गई। इसके आगे
बोली नहीं बढ़ पाई। मुर्राह नस्ल के इस रांझे की उम्र मात्र ढाई साल है। जिसका रोजाना का खर्चा करीब 1500 से दो हजार रुपये तक है। हिमाचली रांझे की देखरेख निक्का राम और उनके परिवारजन करते हैं। उनके मुताबिक रांझे की देखभाल के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। समय पर उसके भोजन की व्यवस्था होती है तथा रोजाना करीब दो लीटर तेल के साथ मालिश की जाती है। गौरतलब है कि बिलासपुर-हमीरपुर सीमा पर स्थित घोड़ी-धबीरी पंचायत के गांव धबीरी में एक भैंसे की पांच करोड़ की बोली का कार्यक्रम रखा गया था। जहां प्रदेश के साथ-साथ बाहरी राज्यों के लोगों ने भाग लिया। बोली 52 लाख से शुरू की गई। जो 1.37 करोड़ तक ही जा पाई। इस पर भैंसे के मालिक ने उसे बेचने से मना कर लिया, लेकिन पांच करोड़ की बोली की सूचना से यह भैंसा पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।
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बोली नहीं बढ़ पाई। मुर्राह नस्ल के इस रांझे की उम्र मात्र ढाई साल है। जिसका रोजाना का खर्चा करीब 1500 से दो हजार रुपये तक है। हिमाचली रांझे की देखरेख निक्का राम और उनके परिवारजन करते हैं। उनके मुताबिक रांझे की देखभाल के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। समय पर उसके भोजन की व्यवस्था होती है तथा रोजाना करीब दो लीटर तेल के साथ मालिश की जाती है। गौरतलब है कि बिलासपुर-हमीरपुर सीमा पर स्थित घोड़ी-धबीरी पंचायत के गांव धबीरी में एक भैंसे की पांच करोड़ की बोली का कार्यक्रम रखा गया था। जहां प्रदेश के साथ-साथ बाहरी राज्यों के लोगों ने भाग लिया। बोली 52 लाख से शुरू की गई। जो 1.37 करोड़ तक ही जा पाई। इस पर भैंसे के मालिक ने उसे बेचने से मना कर लिया, लेकिन पांच करोड़ की बोली की सूचना से यह भैंसा पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।
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