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Bilaspur News: प्राकृतिक खेती ने बदली करोट के किसानों की तकदीर, हल्दी-जिमीकंद बनी कमाई का जरिया
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जुखाला में प्राकृतिक रूप से उगाई गई काली हल्दी। स्रोत: डीपीआरओ
20 क्विंटल हल्दी तैयार कर करीब दो लाख का कारोबार, जिमीकंद से भी हर साल 50-60 क्विंटल उत्पादन
काली हल्दी के भी मिल रहे 300 रुपये किलो तक के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। करोट गांव के किसान प्रेम ठाकुर और उनके तीन भाई प्राकृतिक खेती से अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। परिवार पारंपरिक फसलों गेहूं, मक्की और धान के साथ हल्दी और जिमीकंद की खेती कर रहा है। प्राकृतिक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है। प्रेम ठाकुर पिछले तीन-चार साल से प्राकृतिक तरीके से हल्दी की खेती कर रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने करीब 20 क्विंटल हल्दी तैयार की। इसमें से छह क्विंटल हल्दी जिला आत्मा परियोजना के माध्यम से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची। बाकी हल्दी भी आसपास के लोगों ने इसी दाम पर खरीदी। इससे करीब दो लाख रुपये का कारोबार हुआ। ठाकुर हर साल औसतन 20 से 25 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर रहे हैं। वह काली हल्दी की खेती भी कर रहे हैं। इस वर्ष करीब डेढ़ क्विंटल काली हल्दी तैयार हुई, जिसे 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक का दाम मिला। औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग अच्छी है। अब वह मेघालय की लकाडोंग हल्दी की खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं। इसमें सामान्य हल्दी की अपेक्षा करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है। परिवार करीब तीन बीघा भूमि में जिमीकंद की खेती करता है। हर साल 50 से 60 क्विंटल उत्पादन होता है और प्रदेश से बाहर इसकी बिक्री 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक के दाम पर हो रही है। परिवार वर्ष 1998 से जिमीकंद की खेती कर रहा है। इसके अलावा धान, मक्की, सोयाबीन और विभिन्न दालों का प्राकृतिक तरीके से उत्पादन किया जाता है। विभिन्न फसलों का बीज भी परिवार तैयार करता है। श्याम लाल ठाकुर को वर्ष 2003 में प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की ओर से कृषि दूत सम्मान मिला था। वर्ष 2009 में जिमीकंद की खेती के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। परिवार की बैलों की जोड़ी को बिलासपुर के नलवाड़ी मेले में भी कई बार सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिल चुका है। प्रेम ठाकुर ने बताया कि आत्मा परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण मिला। महाराष्ट्र में सात दिवसीय एक्सपोजर विजिट का अवसर भी मिला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मेहनत अधिक है, लेकिन बेहतर गुणवत्ता और अच्छे दाम किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राकृतिक गेहूं का एमएसपी 60 से बढ़ाकर 80 रुपये, मक्की का 40 से 50 रुपये और कच्ची हल्दी का 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। पहली बार अदरक का एमएसपी भी 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिले में 136 किसानों से करीब 183 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की गई है। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को प्राकृतिक उपज का उचित मूल्य मिले और उनकी आर्थिकी मजबूत हो।
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काली हल्दी के भी मिल रहे 300 रुपये किलो तक के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। करोट गांव के किसान प्रेम ठाकुर और उनके तीन भाई प्राकृतिक खेती से अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। परिवार पारंपरिक फसलों गेहूं, मक्की और धान के साथ हल्दी और जिमीकंद की खेती कर रहा है। प्राकृतिक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है। प्रेम ठाकुर पिछले तीन-चार साल से प्राकृतिक तरीके से हल्दी की खेती कर रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने करीब 20 क्विंटल हल्दी तैयार की। इसमें से छह क्विंटल हल्दी जिला आत्मा परियोजना के माध्यम से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची। बाकी हल्दी भी आसपास के लोगों ने इसी दाम पर खरीदी। इससे करीब दो लाख रुपये का कारोबार हुआ। ठाकुर हर साल औसतन 20 से 25 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर रहे हैं। वह काली हल्दी की खेती भी कर रहे हैं। इस वर्ष करीब डेढ़ क्विंटल काली हल्दी तैयार हुई, जिसे 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक का दाम मिला। औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग अच्छी है। अब वह मेघालय की लकाडोंग हल्दी की खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं। इसमें सामान्य हल्दी की अपेक्षा करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है। परिवार करीब तीन बीघा भूमि में जिमीकंद की खेती करता है। हर साल 50 से 60 क्विंटल उत्पादन होता है और प्रदेश से बाहर इसकी बिक्री 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक के दाम पर हो रही है। परिवार वर्ष 1998 से जिमीकंद की खेती कर रहा है। इसके अलावा धान, मक्की, सोयाबीन और विभिन्न दालों का प्राकृतिक तरीके से उत्पादन किया जाता है। विभिन्न फसलों का बीज भी परिवार तैयार करता है। श्याम लाल ठाकुर को वर्ष 2003 में प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की ओर से कृषि दूत सम्मान मिला था। वर्ष 2009 में जिमीकंद की खेती के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। परिवार की बैलों की जोड़ी को बिलासपुर के नलवाड़ी मेले में भी कई बार सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिल चुका है। प्रेम ठाकुर ने बताया कि आत्मा परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण मिला। महाराष्ट्र में सात दिवसीय एक्सपोजर विजिट का अवसर भी मिला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मेहनत अधिक है, लेकिन बेहतर गुणवत्ता और अच्छे दाम किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्राकृतिक गेहूं का एमएसपी 60 से बढ़ाकर 80 रुपये, मक्की का 40 से 50 रुपये और कच्ची हल्दी का 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। पहली बार अदरक का एमएसपी भी 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिले में 136 किसानों से करीब 183 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की गई है। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को प्राकृतिक उपज का उचित मूल्य मिले और उनकी आर्थिकी मजबूत हो।