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घरों में चल रहे पीजी पर नप कसेगी शिकंजा, जारी होंगे नोटिस
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बिलासपुर। घरों में चले रहे पीजी (पेइंग गेस्ट) पर नगर परिषद ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। नगर परिषद बिलासपुर ऐसे मकान मालिकों से कमर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स वसूलेगी। नगर परिषद ऐसी प्रॉपर्टी का सर्वे करने जा रही है। इसके बाद नोटिस जारी किए जाएंगे। टैक्स का भुगतान नहीं करने वाले पीजी सील कर दिए जाएंगे। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर परिषद हरकत में आई है।
नगर परिषद के रिकॉर्ड में एक भी पीजी पंजीकृत नहीं है, जबकि घरों में पीजी चलाए जा रहे हैं। ऐसे में नगर परिषद को राजस्व का नुकसान हो रहा है। शहर में दर्जनों पीजी घरों में खोले गए हैं। कुछ पीजी मालिक तो बोर्ड लगाकर बाकायदा प्रचार भी कर रहे हैं। पीजी मालिक एक पेइंग गेस्ट से 4 से 6 हजार रुपये तक वसूल करते हैं। पीजी खोलने से पहले नगर परिषद में पंजीकृत करवाना जरूरी होता है। शहर में करीब एक हजार विद्यार्थी पीजी में रहते हैं। अधिकतर पीजी अकादमियों और कॉलेज के पास ही हैं। इनमें मुख्य रूप से रौड़ा और कोसरियां सेक्टर में खुले हैं।
इनसेट
रेजिडेंशियल और कमर्शियल टैक्स की दरों में अंतर
पीजी कमर्शियल कैटेगिरी में आते हैं, जिनके लिए अलग दर तय की गई हैं। कमर्शियल प्रॉपर्टी पर 9 फीसदी की दर से टैक्स वसूला जाता है, जबकि रिहायशी प्रॉपर्टी पर 6 फीसदी की टैक्स दर निर्धारित है। पीजी संचालक नगर परिषद में पंजीकरण नहीं करवाकर प्रॉपर्टी टैक्स देने से बच रहे हैं, जिससे लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान नगर परिषद को हो रहा है।
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कोट्स
नगर परिषद घरों में चलने वाले पीजी का सर्वे करेगी। रिहायशी प्रॉपर्टी पर पीजी का बिजनेस करने वाले मालिकों को नोटिस जारी कर कमर्शियल प्रॉपर्टी के दर से टैक्स वसूला जाएगा। पीजी संचालक नगर परिषद में पंजीकरण करवाएं अन्यथा उन पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उर्वशी वालिया, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद बिलासपुर
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नगर परिषद के रिकॉर्ड में एक भी पीजी पंजीकृत नहीं है, जबकि घरों में पीजी चलाए जा रहे हैं। ऐसे में नगर परिषद को राजस्व का नुकसान हो रहा है। शहर में दर्जनों पीजी घरों में खोले गए हैं। कुछ पीजी मालिक तो बोर्ड लगाकर बाकायदा प्रचार भी कर रहे हैं। पीजी मालिक एक पेइंग गेस्ट से 4 से 6 हजार रुपये तक वसूल करते हैं। पीजी खोलने से पहले नगर परिषद में पंजीकृत करवाना जरूरी होता है। शहर में करीब एक हजार विद्यार्थी पीजी में रहते हैं। अधिकतर पीजी अकादमियों और कॉलेज के पास ही हैं। इनमें मुख्य रूप से रौड़ा और कोसरियां सेक्टर में खुले हैं।
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रेजिडेंशियल और कमर्शियल टैक्स की दरों में अंतर
पीजी कमर्शियल कैटेगिरी में आते हैं, जिनके लिए अलग दर तय की गई हैं। कमर्शियल प्रॉपर्टी पर 9 फीसदी की दर से टैक्स वसूला जाता है, जबकि रिहायशी प्रॉपर्टी पर 6 फीसदी की टैक्स दर निर्धारित है। पीजी संचालक नगर परिषद में पंजीकरण नहीं करवाकर प्रॉपर्टी टैक्स देने से बच रहे हैं, जिससे लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान नगर परिषद को हो रहा है।
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नगर परिषद घरों में चलने वाले पीजी का सर्वे करेगी। रिहायशी प्रॉपर्टी पर पीजी का बिजनेस करने वाले मालिकों को नोटिस जारी कर कमर्शियल प्रॉपर्टी के दर से टैक्स वसूला जाएगा। पीजी संचालक नगर परिषद में पंजीकरण करवाएं अन्यथा उन पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उर्वशी वालिया, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद बिलासपुर