{"_id":"63767488bdaade6fc078be40","slug":"memorandum-submitted-to-remove-illegal-occupation-bilaspur-news-sml428122921","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध कब्जों को हटाने के लिए उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध कब्जों को हटाने के लिए उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलासुपर। मार्केट कमेटी कांप्लेक्स के दुकानदारों ने बिलासपुर बस अड्डे के समीप कांप्लेक्स के सामने से अवैध कब्जों को हटाने के लिए उपायुक्त बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा।
दुकानदार धीरज शर्मा ने बताया कि पुलिस चौकी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध कब्जों की वजह से पार्किंग समस्या बढ़ रही है। कांप्लेक्स की छत पर पहले पार्किंग बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में प्रशासन की ओर से बस अड्डा के आसपास से अवैध कब्जों को हटाकर संबंधित लोगों के पुनर्वास की दृष्टि से प्रशासन ने इस भवन की छत पर 26 बूथ बनाकर उन्हें आवंटित कर दिए। अब उन्हीं लोगों ने अपने बूथ दूसरों को किराये पर दे दिए हैं, और खुद फिर से राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध कब्जे कर लिए हैं। इस कारण दुकानदारों और ग्राहकों के लिए कांप्लेक्स में सामान खरीदने के लिए सभी रास्ते सब्जी विक्रेताओं की ओर से बंद कर दिए गए हैं। अवैध कब्जों का सिलसिला अभी भी जारी है। अवैध तरीके से बनाए गए ढांचों में बिजली के कनेक्शन तक दे दिए गए हैं।
पार्किंग सुविधा के अभाव में मार्केट कमेटी कांप्लेक्स के दुकानदारों का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। वहीं, अवैध कब्जों की वजह से राजमार्ग पर अक्सर ट्रैफिक जाम भी होता रहता है। इस कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। कमेटी के सचिव को पहले भी समस्या बताई जा चुकी है। उन्होंने यह मामला प्रशासन के सामने रखा। प्रशासन की ओर से मामले की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विज्ञापन
आरटीआई से हासिल की गई जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग और पुलिस ने यह जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया है कि अवैध कब्जा करके दुकानदारी करने वाले लोग नगर परिषद के पास पर्ची कटवाते हैं। वहीं, नगर परिषद का कहना है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बनाए गए खोखों और रेहड़ियों की पर्ची नहीं काटती है। अवैध कब्जे हटाने के बजाए पुलिस प्रशासन ने वहां बाकी बची जगह में नो पार्किंग का बोर्ड लगा दिया है। उन्होंने आग्रह है किया कि अवैध कब्जों को हटाने के लिए मौके पर आकर स्थिति का जायजा लें। समय रहते उचित कार्रवाई न होने की स्थिति में दुकानदारों को उपायुक्त कार्यालय परिसर में धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
विज्ञापन
दुकानदार धीरज शर्मा ने बताया कि पुलिस चौकी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध कब्जों की वजह से पार्किंग समस्या बढ़ रही है। कांप्लेक्स की छत पर पहले पार्किंग बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में प्रशासन की ओर से बस अड्डा के आसपास से अवैध कब्जों को हटाकर संबंधित लोगों के पुनर्वास की दृष्टि से प्रशासन ने इस भवन की छत पर 26 बूथ बनाकर उन्हें आवंटित कर दिए। अब उन्हीं लोगों ने अपने बूथ दूसरों को किराये पर दे दिए हैं, और खुद फिर से राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध कब्जे कर लिए हैं। इस कारण दुकानदारों और ग्राहकों के लिए कांप्लेक्स में सामान खरीदने के लिए सभी रास्ते सब्जी विक्रेताओं की ओर से बंद कर दिए गए हैं। अवैध कब्जों का सिलसिला अभी भी जारी है। अवैध तरीके से बनाए गए ढांचों में बिजली के कनेक्शन तक दे दिए गए हैं।
विज्ञापन
पार्किंग सुविधा के अभाव में मार्केट कमेटी कांप्लेक्स के दुकानदारों का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। वहीं, अवैध कब्जों की वजह से राजमार्ग पर अक्सर ट्रैफिक जाम भी होता रहता है। इस कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। कमेटी के सचिव को पहले भी समस्या बताई जा चुकी है। उन्होंने यह मामला प्रशासन के सामने रखा। प्रशासन की ओर से मामले की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विज्ञापन
आरटीआई से हासिल की गई जानकारी के अनुसार संबंधित विभाग और पुलिस ने यह जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया है कि अवैध कब्जा करके दुकानदारी करने वाले लोग नगर परिषद के पास पर्ची कटवाते हैं। वहीं, नगर परिषद का कहना है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बनाए गए खोखों और रेहड़ियों की पर्ची नहीं काटती है। अवैध कब्जे हटाने के बजाए पुलिस प्रशासन ने वहां बाकी बची जगह में नो पार्किंग का बोर्ड लगा दिया है। उन्होंने आग्रह है किया कि अवैध कब्जों को हटाने के लिए मौके पर आकर स्थिति का जायजा लें। समय रहते उचित कार्रवाई न होने की स्थिति में दुकानदारों को उपायुक्त कार्यालय परिसर में धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।