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Bilaspur News: नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के प्रति किया जागरूक
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- जातीय भेदभाव करने पर सजा के साथ भरना पड़ता है जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत जागरूकता शिविर जुखाला में लगाया गया।
इस शिविर में अधिवक्ता प्रकाश चंद बंसल, जिला न्यायालय बिलासपुर ने उक्त अधिनियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के बारे में बताया कि यह अधिनियम भारत सरकार द्वारा लागू किया गया था। इस अधिनियम में प्रावधान है कि अगर कोई सामान्य वर्ग का व्यक्ति अनुसूचित जाति व जनजाति के व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का जातीय भेदभाव करता है तो उस व्यक्ति को कम से कम एक माह की सजा और जुर्माना भी किया जाएगा। भारत के हर नागरिक को किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक स्थान में जाने का कानूनी अधिकार है। अगर कोई सामान्य वर्ग का व्यक्ति इस प्रकार का जातीय भेदभाव करता है तो पीड़ित पुलिस के पास शिकायत दर्ज करके एफआईआर दर्ज करवा सकता है। इसी के साथ अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण )अधिनियम 1989 में सख्त प्रावधान किए हैं।
इस शिविर में उप निरीक्षक महेंद्र सिंह, चौकी इंचार्ज नम्होल द्वारा प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। उन्होंने बच्चों को नशे से बचाव करने के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों की पालना करने, बैंक फ्रॉड के बारे में भी जानकारी दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत जागरूकता शिविर जुखाला में लगाया गया।
इस शिविर में अधिवक्ता प्रकाश चंद बंसल, जिला न्यायालय बिलासपुर ने उक्त अधिनियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के बारे में बताया कि यह अधिनियम भारत सरकार द्वारा लागू किया गया था। इस अधिनियम में प्रावधान है कि अगर कोई सामान्य वर्ग का व्यक्ति अनुसूचित जाति व जनजाति के व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का जातीय भेदभाव करता है तो उस व्यक्ति को कम से कम एक माह की सजा और जुर्माना भी किया जाएगा। भारत के हर नागरिक को किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक स्थान में जाने का कानूनी अधिकार है। अगर कोई सामान्य वर्ग का व्यक्ति इस प्रकार का जातीय भेदभाव करता है तो पीड़ित पुलिस के पास शिकायत दर्ज करके एफआईआर दर्ज करवा सकता है। इसी के साथ अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण )अधिनियम 1989 में सख्त प्रावधान किए हैं।
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इस शिविर में उप निरीक्षक महेंद्र सिंह, चौकी इंचार्ज नम्होल द्वारा प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। उन्होंने बच्चों को नशे से बचाव करने के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों की पालना करने, बैंक फ्रॉड के बारे में भी जानकारी दी।
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