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Bilaspur News: श्रमिकों के लिए कानून तो बना, पर सुनवाई कहीं नहीं

Tue, 29 Aug 2023 05:17 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Aug 2023 05:17 PM IST
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Law was made for the workers, but there is no hearing
प्रदेश निर्माण कामगार संघ ने उपायुक्त के माध्यम से सीएम को भेजा ज्ञापन
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-बोले, जारी की जाए तीन साल से लंबित कानूनी सहायता क्लेमों की राशि


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश निर्माण कामगार संघ ने उपायुक्त बिलासपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर समस्याओं से अवगत कराया। संघ ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्या का जल्द निवारण करेगी।
हिमाचल प्रदेश निर्माण कामगार संघ की महासचिव सरोज लता ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में प्राकृतिक आपदा ने तबाही मचाई है। इससे कोई भी अछूता नहीं रहा। सरकार ने आपदा काल में जनता को हर मुमकिन राहत प्रदान की है। इस आपदा में यह श्रमिक रास्तों, सड़कों, पुलों, पानी की योजनाओं और भवन निर्माण, मरम्म्त में लगे हैं। प्रदेश को दोबारा पटरी पर लाने का काम कर रहे हैं। निर्माण श्रमिकों के जीवन की दुर्दशा को सुधारने के लिए भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण कानून बना है। यह निर्माण श्रमिकों को कानूनी अधिकार देता है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में यह कानून अंतिम सांसें ले रहा है। श्रमिकों का फंड अधिकारी वर्ग, वाहनों और अन्य कर्मचारियों पर ही खर्च हो रहा है। मजदूरों को एक पाई भी नहीं दी जा रही है। हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड ने तो काम ठप कर रखा है। बोर्ड की पिछली दो बैठकों में बोर्ड के अध्यक्ष एवं श्रम व रोजगार मंत्री धनीराम शांडिल ने बोर्ड को आदेश दिया था कि पात्र लाभार्थियों को उनके तीन साल से लंबित कानूनी सहायता क्लेमों की राशि जारी की जाए, लेकिन बोर्ड के अधिकारी और जिलों के श्रम कल्याण अधिकारी मंत्री के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि मजदूरों के पंजीकरण एवं क्लेम से संबंधित फार्मों को लगभग पिछले दो वर्ष से पूरी औपचारिकताओं के साथ शिमला भेजा गया था। उनके ऊपर आपत्तियां लगाकर वापस मजदूरों को भेजा जा रहा है। मजदूरों के बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाए जा रहे हैं। कहा कि यह मजदूरों के साथ घोर अन्याय है, लेकिन सहायता के नाम पर कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। कहा कि आपदा को देखते हुए इस वंचित निर्माण श्रमिक वर्ग को सामाजिक न्याय देते हुए बोर्ड के पास पड़े फंड से इनकी सहायता की जाए। ताकि उन्हें जीवन यापन में कोई मुश्किल न हो।
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