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Bilaspur News: बाड़ा दा घाट में दी रेशम कीट पालन की जानकारी
Wed, 29 Jan 2025 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:46 PM IST
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- अनुसंधान प्रसार केंद्र ने किया कार्यशाला का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। किसान दिवस/प्रक्षेत्र दिवस के अवसर पर उप तहसील भराड़ी के बाड़ा दा घाट में रेशम अनुसंधान प्रसार केंद्र की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। अध्यक्षता भराडी पंचायत के प्रधान प्यारे लाल शर्मा और उप प्रधान संजीव चौधरी ने की। शिव शक्ति व्यापार मंडल भराड़ी एवं बाडा दा घाट के प्रधान पृथी सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
वैज्ञानिक रीता सिंह ने रेशम कीट पालन में समय-समय पर उनकी साफ-सफाई, दवा का छिड़काव करने की पूरी प्रक्रिया प्रयोग करके उपस्थित किसानों को बताई। उसके बाद तकनीशियन प्रवीण ने कितनी मात्रा में दवा का घोल तैयार करना और कब छिड़काव करना है, इस बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेशम कीट का पालन आजीविका के साथ महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का भी एक मजबूत साधन है। कम दिनों की मेहनत और घर बैठे रोजगार का सबसे सरल तरीका रेशम पालन है। साथ ही साल में दो बार रेशम की फसल को तैयार कर जीविका प्राप्त की जा सकती है। हिमाचल रेशम बोर्ड से कर्मचारी बलवंत ने शहतूत की पौध तैयार करने और उसके सरंक्षण के बारे में जानकारी दी। किसानों ने इस शिविर में चर्चा भी की और अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। शिविर में बलवंत, गायत्री शर्मा, अमरनाथ, बृजलाल, प्रेम लाल, सुरेश, दूनी चंद, अनूप कुमार, अजय आदि उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। किसान दिवस/प्रक्षेत्र दिवस के अवसर पर उप तहसील भराड़ी के बाड़ा दा घाट में रेशम अनुसंधान प्रसार केंद्र की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। अध्यक्षता भराडी पंचायत के प्रधान प्यारे लाल शर्मा और उप प्रधान संजीव चौधरी ने की। शिव शक्ति व्यापार मंडल भराड़ी एवं बाडा दा घाट के प्रधान पृथी सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
वैज्ञानिक रीता सिंह ने रेशम कीट पालन में समय-समय पर उनकी साफ-सफाई, दवा का छिड़काव करने की पूरी प्रक्रिया प्रयोग करके उपस्थित किसानों को बताई। उसके बाद तकनीशियन प्रवीण ने कितनी मात्रा में दवा का घोल तैयार करना और कब छिड़काव करना है, इस बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेशम कीट का पालन आजीविका के साथ महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का भी एक मजबूत साधन है। कम दिनों की मेहनत और घर बैठे रोजगार का सबसे सरल तरीका रेशम पालन है। साथ ही साल में दो बार रेशम की फसल को तैयार कर जीविका प्राप्त की जा सकती है। हिमाचल रेशम बोर्ड से कर्मचारी बलवंत ने शहतूत की पौध तैयार करने और उसके सरंक्षण के बारे में जानकारी दी। किसानों ने इस शिविर में चर्चा भी की और अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए। शिविर में बलवंत, गायत्री शर्मा, अमरनाथ, बृजलाल, प्रेम लाल, सुरेश, दूनी चंद, अनूप कुमार, अजय आदि उपस्थित रहे।
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