{"_id":"67bf14355061cfca430be14c","slug":"importance-of-fasting-and-worship-of-four-hours-explained-in-shiva-mahapuran-story-bilaspur-news-c-92-1-bls1001-132797-2025-02-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: शिव महापुराण कथा में व्रत और चार पहर की पूजा का बताया महत्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: शिव महापुराण कथा में व्रत और चार पहर की पूजा का बताया महत्व
विज्ञापन
श्री नयना देवी जी में चल रहे महाशिव पुराण कथा में कथावचन करते आचार्य। संवाद
-श्री नयना देवी जी में चल रहा शिवरात्रि महोत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी देवी जी (बिलासपुर)। शक्ति श्री नयना देवी जी में चल रहे शिवरात्रि महोत्सव में शिव महापुराण कथा के दौरान व्यास पंकज अग्निहोत्री ने महाशिवरात्रि का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि इस दिन शिव भगवान का व्रत पूजन और चार पहर की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि क्यों मनाई जाती हैं, इसकी अलग-अलग कथाएं हैं। यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, लेकिन उन्होंने बताया कि जो महाशिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार भगवान महाशिवरात्रि के दिन शिव ज्योतिर्मय स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे। इस धरती पर प्रकट होकर कई जनकल्याण के कार्य किए। यह जगह चेन्नई में जहां रमन मुनि का आश्रम है। वहां पर सिद्धेश्वर महादेव के नाम से आज भी विख्यात है। उन्होंने बताया कि आज भी लाखों लोग वहां दर्शनों के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि तमिल ग्रंथ में एक उल्लेख आता है कि भील नामक शिकारी ने अनजाने में महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा कर दी थी। हालांकि उसका ये उद्देश्य नहीं था वह तो शिकार खेलने के लिए आया था लेकिन अनजाने में की गई पूजा से भी शिव भगवान बहुत प्रसन्न हुए और उसे शिव धाम प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि की उपलक्ष्य पर जो भी भक्त पूजा अर्चना व्रत करते है उनकी शिव भगवान सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्री नयना देवी देवी जी (बिलासपुर)। शक्ति श्री नयना देवी जी में चल रहे शिवरात्रि महोत्सव में शिव महापुराण कथा के दौरान व्यास पंकज अग्निहोत्री ने महाशिवरात्रि का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि इस दिन शिव भगवान का व्रत पूजन और चार पहर की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि क्यों मनाई जाती हैं, इसकी अलग-अलग कथाएं हैं। यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, लेकिन उन्होंने बताया कि जो महाशिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार भगवान महाशिवरात्रि के दिन शिव ज्योतिर्मय स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे। इस धरती पर प्रकट होकर कई जनकल्याण के कार्य किए। यह जगह चेन्नई में जहां रमन मुनि का आश्रम है। वहां पर सिद्धेश्वर महादेव के नाम से आज भी विख्यात है। उन्होंने बताया कि आज भी लाखों लोग वहां दर्शनों के लिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि तमिल ग्रंथ में एक उल्लेख आता है कि भील नामक शिकारी ने अनजाने में महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा कर दी थी। हालांकि उसका ये उद्देश्य नहीं था वह तो शिकार खेलने के लिए आया था लेकिन अनजाने में की गई पूजा से भी शिव भगवान बहुत प्रसन्न हुए और उसे शिव धाम प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि की उपलक्ष्य पर जो भी भक्त पूजा अर्चना व्रत करते है उनकी शिव भगवान सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
विज्ञापन